Latehar: जिले के बालूमाथ के डूडमी टोला में रविवार देर रात वज्रपात की घटना में दो पशुपालक परिवारों की तीन दुधारू भैंसों की मौत हो गई. घटना 23 अगस्त 2026 की रात करीब 12 बजे की बताई जा रही है. अचानक हुए वज्रपात की चपेट में आने से तीनों पशुओं की मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद दोनों परिवारों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है.

सुखदेव महतो की दो भैंसों की गई जान
मिली जानकारी के अनुसार, डूडमी टोला निवासी सुखदेव महतो, पिता स्व. तुलसी महतो की दो दुधारू भैंसें वज्रपात की चपेट में आ गईं. दोनों भैंसें प्रतिदिन करीब 10 से 12 लीटर दूध देती थीं. पशुओं की मौत से परिवार को आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान हुआ है.
दिलेश्वर यादव की दुधारू भैंस भी मरी
वहीं, इसी घटना में दिलेश्वर यादव, पिता सुखदेव यादव की एक दुधारू भैंस की भी मौत हो गई. बताया गया कि यह भैंस भी प्रतिदिन करीब 10 से 12 लीटर दूध देती थी. एक साथ तीन दुधारू पशुओं की मौत से दोनों परिवारों की नियमित आय का बड़ा स्रोत प्रभावित हुआ है.
पशुधन पर निर्भर थी परिवारों की आय
ग्रामीणों के अनुसार, दोनों परिवारों की आय में पशुधन की महत्वपूर्ण भूमिका थी. दुधारू भैंसों से मिलने वाले दूध की बिक्री से परिवारों को नियमित आमदनी होती थी. ऐसे में तीन पशुओं की एक साथ मौत होने से परिवारों को तत्काल आर्थिक नुकसान के साथ भविष्य की आय का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
प्रशासन से मुआवजे की गुहार
घटना के बाद पीड़ित पशुपालकों ने प्रशासन और संबंधित पशुपालन एवं आपदा प्रबंधन विभाग से मुआवजे की मांग की है. उन्होंने प्रशासन से घटना का स्थलीय निरीक्षण कर पंचनामा तैयार कराने तथा मृत पशुओं का आवश्यक सत्यापन कराने की मांग की है. पशुपालकों का कहना है कि सरकारी प्रावधान के तहत उन्हें उचित मुआवजा और क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई जाए.
ग्रामीणों ने जल्द राहत दिलाने की मांग की
ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मामले में गंभीरता दिखाते हुए संबंधित पदाधिकारियों को घटनास्थल का निरीक्षण करने और पीड़ित परिवारों को जल्द राहत उपलब्ध कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि पशुधन की क्षति से प्रभावित परिवारों को तत्काल सरकारी सहायता मिलने से उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलेगी.
वास्तविक नुकसान के आधार पर सहायता की मांग
पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से दुधारू पशुओं की वास्तविक कीमत के साथ उनसे होने वाली नियमित आय को भी ध्यान में रखते हुए नियमानुसार अधिकतम संभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है.

