Ranchi: झारखंड की नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) में पिछले तीन दिनों के दौरान एक दुर्लभ संयोग देखने को मिला. एक ओर जहां लगभग एक साल से जेल में बंद निलंबित वरिष्ठ IAS और पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद 7 अगस्त को जेल से बाहर आए. वहीं दूसरी ओर JPSC परीक्षा धांधली मामले में पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID ने 10 अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

लैंड स्कैम मामले में निलंबित IAS विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से राहत
हजारीबाग जमीन घोटाले से जुड़े एक मामले में पिछले एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली थी. झारखंड हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद चौबे ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने उनकी सशर्त जमानत मंजूर कर ली. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए विनय चौबे को देश छोड़कर न जाने, जांच में पूरा सहयोग करने और मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित या संपर्क न करने का स्पष्ट निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान विनय चौबे के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह मामला वर्ष 2009-10 के उनके कार्यकाल से जुड़ा है और केस के अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है. उल्लेखनीय है कि 28 अप्रैल को झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. यह मामला हजारीबाग में हुए भूमि घोटाले से संबंधित है, जिसमें एंटी करप्शन ब्यूरो ने कांड संख्या 11/2025 दर्ज की है. इस केस में विनय चौबे के अलावा उनके करीबी विनय सिंह, स्निग्धा सिंह, हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद और तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार समेत कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है. इस मामले में जेल में बंद विनय चौबे 7 अगस्त को जेल से बाहर आए है.

JPSC परीक्षा धांधली: CID की बड़ी कार्रवाई, पूर्व सीएस एल. खियांग्ते गिरफ्तार
दूसरी तरफ, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में हुई बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के मामले में जांच कर रही CID ने सख्त कार्रवाई करते हुए राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया. CID की टीम 28 जुलाई से ही एल. खियांगते से कई दौर की पूछताछ कर रही थी. सिलसिलेवार समन और पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद CID ने दस अगस्त को उन्हें गिरफ्तार किया और अपने कार्यालय ले जाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. यह पूरी कार्रवाई JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं के संचालन में हुई धांधली को लेकर की जा रही है.
