Bihar: बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी है. राज्य में दो नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे. इसके लिए उद्योग विभाग ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है. मुजफ्फरपुर और दरभंगा में कुल 1050 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है. दोनों पार्कों को भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या) के तहत विकसित करने की योजना है. यहां खास तौर पर निर्माण क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों और एमएसएमई इकाइयों को प्राथमिकता दी जाएगी.

मुजफ्फरपुर में 700 और दरभंगा में 350 एकड़ जमीन
भव्या योजना के पहले चरण के तहत बिहार सरकार ने केंद्र को दोनों औद्योगिक पार्कों का प्रस्ताव भेजा है. मुजफ्फरपुर के पारू में 700 एकड़ और दरभंगा में 350 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है. प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार विकास कार्यों के लिए प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये की दर से कुल 1050 करोड़ रुपये की सहायता देगी. इस राशि से औद्योगिक पार्कों के साथ आसपास की आधारभूत संरचनाओं का विकास किया जाएगा. बाहरी कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए परियोजना लागत का 25 फीसदी तक अतिरिक्त सहयोग भी मिल सकता है.
पटना-बेतिया फोरलेन के पास होगा मुजफ्फरपुर पार्क
उद्योग सचिव कुंदन कुमार के अनुसार, भव्या योजना के तहत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है. मुजफ्फरपुर के पारू में चिह्नित जमीन पटना-बेतिया फोरलेन के नजदीक है. इससे औद्योगिक इकाइयों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई आसान होगी. इस पार्क में कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी इकाइयों को प्राथमिकता देने की योजना है.
दरभंगा में लॉजिस्टिक पार्क के पास विकसित होगा औद्योगिक पार्क
दरभंगा में बहादुरपुर के नजदीक 350 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है. यह स्थान मिथिला टाउनशिप के करीब है. यहां एक लॉजिस्टिक पार्क भी विकसित किया जा रहा है. ऐसे में औद्योगिक पार्क को बेहतर कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है. भव्या योजना के पहले चरण में केंद्र सरकार ने देशभर से 20 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव मांगे हैं. अगर बिहार के प्रस्ताव में किसी तरह की कमी पाई जाती है तो राज्य सरकार दूसरे चरण में फिर से आवेदन कर सकेगी.
प्लग एंड प्ले मॉडल पर तैयार होंगे पार्क
मुजफ्फरपुर और दरभंगा के दोनों औद्योगिक पार्कों को प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा. इसके तहत कंपनियों को जमीन के साथ तैयार शेड उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे कंपनियों को शुरुआत के लिए बड़े निर्माण कार्य की जरूरत नहीं होगी और वे अपनी मशीनें लगाकर जल्द उत्पादन शुरू कर सकेंगी. इन औद्योगिक पार्कों का उद्देश्य राज्य में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करना है. उद्योग विभाग के अनुमान के मुताबिक, दोनों पार्कों में स्थापित होने वाली इकाइयों से करीब 12 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
एमएसएमई इकाइयों को मिलेगा बढ़ावा
औद्योगिक पार्कों में एमएसएमई इकाइयों को ज्यादा से ज्यादा जगह देने की योजना है. केंद्र सरकार की योजना के तहत निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देकर राज्य में उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. स्थानीय जरूरतों के अनुसार उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा मिलने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. इसी दिशा में बिहार सरकार नई एमएसएमई नीति लाने की तैयारी भी कर रही है.
बिजली-पानी से लेकर कचरा प्रबंधन तक की होगी सुविधा
औद्योगिक पार्कों में आधुनिक आधारभूत संरचनाएं विकसित की जाएंगी. यहां बिजली, पानी, सड़क, ड्रेनेज, पेयजल और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. पानी और औद्योगिक कचरे के प्रबंधन के लिए आधुनिक व्यवस्था तैयार की जाएगी. पार्क में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) भी स्थापित किया जाएगा, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट जल का साझा और केंद्रीकृत तरीके से उपचार किया जा सकेगा. इसके अलावा रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा.

कामगारों के लिए आवास और सिंगल विंडो सिस्टम
औद्योगिक पार्कों में कामगारों के लिए आवास की सुविधा विकसित करने की भी योजना है. उत्पादों की गुणवत्ता जांच और मानक प्रमाणन के लिए लैब स्थापित की जाएगी. वहीं, प्लग एंड प्ले शेड में इकाइयां स्थापित करने वाली कंपनियों को जरूरी एनओसी हासिल करने में परेशानी न हो, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी. इससे कंपनियों को विभिन्न विभागों की मंजूरी लेने की प्रक्रिया आसान होगी और औद्योगिक इकाइयों की स्थापना में तेजी आएगी.
