Newswave Desk: राजस्थान के जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल कैंप में बुधवार को एक अनोखा और भावुक नजारा देखने को मिला. पहली बार इस खुली जेल में रह रहे दो बंदी विवाह बंधन में बंधे. हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा ने राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति के बाद सात फेरे लिए. इस खास मौके पर 21 लोगों को शादी में शामिल होने की अनुमति दी गई थी. राजस्थान हाईकोर्ट की न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और प्रवीर भटनागर की खंडपीठ के आदेश पर यह विवाह संपन्न हुआ. इसे अच्छे आचरण वाले बंदियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में उनकी वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
शामियाने में हुई शादी, ढोल-थाली के बीच निभाई गई रस्में
मूलाराम जिस क्वार्टर में ओपन जेल में रहते हैं, वहीं छोटा सा शामियाना लगाकर विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं. ढोल-थाली की गूंज के बीच दूल्हे ने तोरण मारा, जिसके बाद दुल्हन सीमा के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए. विवाह समारोह में जेल प्रशासन और दोनों परिवारों के सदस्य मौजूद रहे. सीमा का कन्यादान करने वाले राधाकिशन ने बताया कि उन्होंने सीमा को गोद लिया है और यह विवाह समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश देगा. उन्होंने बताया कि सीमा को पेरोल पर लाकर शादी की रस्में पूरी कराई गईं.
अच्छे आचरण के कारण मिली ओपन जेल में रहने की सुविधा
मूलाराम 16 जनवरी 2017 से जमीन विवाद में पड़ोसी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं. अच्छे आचरण के चलते उन्हें मंडोर ओपन जेल में रखा गया, जहां बंदी अपने परिवार के साथ रह सकते हैं. वहीं, सीमा भी अपने पति की हत्या के मामले में सजा काट रही हैं और फिलहाल जमानत पर हैं. मंडोर ओपन जेल में दोनों की मुलाकात हुई और बाद में वे साथ रहने लगे. विवाह की अनुमति देने से पहले हाईकोर्ट ने दो अधिवक्ताओं से जांच कराई, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में दोनों के लिव-इन में रहने की पुष्टि की थी.
जेल के फार्म पर करते हैं खेती
विवाह के बाद दोनों ने सभी का आभार व्यक्त किया. जेल प्रशासन के अनुसार, मूलाराम और सीमा ओपन जेल परिसर में स्थित कृषि फार्म पर खेती का कार्य करते हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह विवाह दोनों के नए जीवन की शुरुआत है और भविष्य में उनके सामाजिक पुनर्वास में मदद करेगा.
आर्टिकल 21 के तहत मिली अनुमति
हाईकोर्ट के अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के आधार पर अदालत ने दोनों को विवाह की अनुमति दी. वहीं, समारोह में शामिल हुए पूर्व बंदी और वर्तमान सब इंस्पेक्टर लाला राम चौधरी ने कहा कि यह विवाह नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है और समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश देता है.
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