अपडेटः उत्क्रमित पदस्थापन का युग खत्म, अनुभवी अफसरों को मिलेगा उनका हक, बदलेगी जिलों की प्रशासनिक तस्वीर, सेवा के पदों का होगा युक्तिसंगत पुनर्गठन

Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में अब एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है. राज्य के सुदूर प्रखंडों और अंचलों...

Update: The era of reversed postings is over, experienced officers will receive their due, the administrative landscape of districts will change, and service positions will be rationally reorganized.

Ranchi: झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में अब एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है. राज्य के सुदूर प्रखंडों और अंचलों में तैनात झारखंड प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों के पदस्थापन में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार ने एक बड़े ‘रैशनल’ (युक्तिसंगत) बदलाव की कमर कस ली है. अब तक प्रोन्नति के बाद भी अधिकारियों का अपने मूल वेतनमान से निम्नतर पदों पर बने रहना न केवल उनकी कार्यदक्षता को प्रभावित कर रहा था, बल्कि शासन की गति को भी धीमा कर रहा था. अब इस व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने की तैयारी है.

प्रशासनिक फेरबदल का आधार, अनुभव का लाभ, सुशासन की नींव

राज्य के नीति-निर्धारकों ने यह महसूस किया है कि जब एक अनुभवी पदाधिकारी, जिसका पदनाम और वेतनमान उच्च स्तर का है, उसे किसी निम्नतर पद पर रखा जाता है, तो उसकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता, लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि प्रशासनिक दृष्टिकोण से पदों का पुनर्गठन हो. वर्तमान में राज्य के 271 प्रशासनिक इकाइयों में से बड़ी संख्या में पदों पर विसंगतियां बनी हुई हैं, जिससे विकास कार्यों की गति पर असर पड़ता है. अब सरकार का जोर इस बात पर है कि ‘सही काम के लिए सही अधिकारी’ का मंत्र लागू किया जाए.

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164 इकाइयों में होगा दोहरी मजबूती का दौर

सरकार की प्रस्तावित योजना के अनुसार, राज्य की कुल 271 प्रशासनिक इकाइयों को उनकी कार्यभार क्षमता के आधार पर चिन्हित किया गया है. जिन प्रखंडों या अंचलों में पंचायतों की संख्या 12 या उससे अधिक है, वहां अब प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचल अधिकारी (सीओ) के रूप में दो अलग-अलग वरिष्ठ पदाधिकारियों का पदस्थापन किया जाएगा. इस तरह कुल 164 प्रशासनिक इकाइयों को ‘डबल स्ट्रेंथ’ के साथ सशक्त किया जाएगा, ताकि राजस्व और विकास कार्यों में कोई बाधा न आए. वहीं, कम कार्यभार वाली 53 इकाइयों में केवल अंचल अधिकारी और 54 इकाइयों में केवल प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को तैनात कर प्रशासनिक कसावट लाई जाएगी.

रांची और खूंटी: प्रशासनिक सुधार की अग्रिम पंक्ति

राजधानी रांची और उसके आसपास के क्षेत्रों में प्रशासनिक सुगमता के लिए बड़ा बदलाव दिखेगा. रांची के कांके, नामकुम, रातू, चान्हो, ओरमांझी, सोनाहातू, बुढ़मू, तमाड़, बेड़ो, सिल्ली, मांडर, अनगड़ा, खलारी और नगड़ी में अब बीडीओ और सीओ के पदों का पूर्ण और युक्तिसंगत आवंटन होगा. इसी तरह खूंटी के तोरपा, मुरहू, कर्रा, रनिया और अड़की में प्रशासनिक क्षमता को नई दिशा दी जाएगी.

गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में नई व्यवस्था

गुमला के गुमला सदर, रायडीह, घाघरा, सिसई, बसिया और पालकोट में प्रशासनिक ढांचा अब प्रोन्नति के अनुरूप होगा. सिमडेगा के बानो और ठेठईटांगर तथा लोहरदगा के कुडू प्रखंड में भी इसी तर्ज पर पदस्थापन सुनिश्चित किए जाएंगे.

कोल्हान: विकास की रफ्तार और प्रशासनिक तालमेल

कोल्हान प्रमंडल में विकास कार्यों की प्राथमिकता को देखते हुए पश्चिम सिंहभूम (चाईबासा) के चाईबासा सदर, जगन्नाथपुर, चक्रधरपुर, मनोहरपुर, नोवामुंडी, खूंटपानी और बंदगांव में बड़े बदलाव होंगे. सरायकेला-खरसावां के सरायकेला, ईचागढ़, नीमडीह, राजनगर, गम्हरिया, चांडिल और खरसावां में भी नई टीम तैनात होगी. वहीं पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के चाकुलिया, पोटका, पटमदा, घाटशिला, बहरागोड़ा और मुसाबनी में प्रशासनिक सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.

हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा और चतरा का कायाकल्प

उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के लिए यह बदलाव गेम चेंजर साबित होगा. हजारीबाग के हजारीबाग सदर, कटकमसांडी, बड़कागांव, बरही, विष्णुगढ़, केरेडारी, चौपारण, ईचाक, बरकट्ठा और डाडी, तथा रामगढ़ के मांडू, गोला, पतरातू और चितरपुर में पदाधिकारियों की नई खेप तैनात की जाएगी. कोडरमा में कोडरमा सदर, जयनगर, चंदवारा, सतगांवा, मरकच्चो और डोमचांच तथा चतरा के चतरा, टंडवा, शालिग्राम नारायणपुर, सिमरिया और प्रतापपुर में भी अब पदस्थापन वेतनमान के अनुरूप होंगे.

धनबाद और बोकारो: औद्योगिक क्षेत्रों में प्रशासनिक कसावट

कोयलांचल धनबाद के गोविंदपुर, निरसा, बलियापुर, बाघमारा, तोपचांची, कलियासोल और एग्यारकुंड तथा बोकारो के चास, चंदनकियारी, बेरमो, कसमार, पेटरवार, गोमिया, चंद्रपुरा और नावाडीह में प्रशासनिक अधिकारियों की युक्तिसंगत तैनाती से औद्योगिक और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा.

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संथाल परगना: सुदूर क्षेत्रों में बढ़ेगी प्रशासनिक मौजूदगी

संथाल परगना के दुमका में दुमका सदर, जामा, जरमुंडी, रामगढ़, सरैयाहाट, शिकारीपाड़ा, रानेश्वर और मसलिया, जामताड़ा के जामताड़ा, नाला, करमाटांड विद्यासागर, नारायणपुर और कुंडहित, तथा देवघर के देवघर सदर, मधुपुर, मोहनपुर, सारवां, देवीपुर, पालोजोरी, मारगोमुंडा, सारठ और करौ में नई पदस्थापन व्यवस्था लागू होगी. इसी तरह गोड्डा के गोड्डा, पत्थरगामा, महागामा, मेहरमा, पोड़ैयाहाट, ठाकुरगंगटी, बोआरीजोर और सुंदरपहाड़ी, पाकुड़ के पाकुड़, महेशपुर, हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा, अमरापाड़ा और पाकुड़िया, तथा साहेबगंज के बरहेट, बरहरवा, उधवा, राजमहल, बोरियो, तालझारी और पतना में सरकार का ध्यान अब प्रशासनिक इकाइयों को सुदृढ़ करने पर है.

पलामू प्रमंडल: सुदूर प्रखंडों में विकास की नई इबारत

पलामू प्रमंडल में अब पदाधिकारियों के अनुभव का सही लाभ जनता को मिलेगा. पलामू के मेदिनीनगर, चैनपुर, हुसैनाबाद, पांकी, छत्तरपुर, पाटन, तरहसी, नौडीहा बाजार, विश्रामपुर, सतबरवा, मोहम्मदगंज और पाडु, लातेहार के लातेहार, मनिका, गारू, बालूमाथ, महुआडांड, बरवाडीह, हेरहंज और सरयू, तथा गढ़वा के गढ़वा, रंका, मेराल, मझिआंव, रमकंडा, चिनियां, डंडई, धुरकी, बरडीहा, विशुनपुरा, डंडा, संगमा, बड़गड़, भवनाथपुर, नगरउंटारी और केतार में नई कार्यप्रणाली से विकास योजनाओं को गति मिलेगी.

केवल अंचल अधिकारी के पदों पर विशेष ध्यान

सरकार ने उन क्षेत्रों को भी चिन्हित किया है जहां केवल अंचल अधिकारी की नियुक्ति से काम सुचारू हो सकता है. रांची शहर, अरगोड़ा, बड़गाई, हेहल, बुण्डू, ईटकी, लापुंग और राहे जैसे क्षेत्रों में अंचल संबंधी कार्यों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. इसी प्रकार खूंटी सदर, गुमला के भरनो और विशुनपुर, सिमडेगा के सिमडेगा सदर, कोलेबीरा और बोलवा में अब अंचल प्रशासन की अलग पहचान होगी.

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