Ranchi: गांवों में जमीन, पारिवारिक और आपसी विवादों को अदालत तक पहुंचने से पहले बातचीत और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने की पहल तेज हो गई है. इसी उद्देश्य से ‘सामुदायिक मध्यस्थता : एक मुकदमा-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर-2026’ अभियान के तहत डालसा हॉल, रांची में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. आठ अगस्त से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 अगस्त तक चलेगा. कार्यक्रम के दूसरे दिन पीएलवी, पंचायतों से आए गणमान्य लोगों और संबंधित सदस्यों को सामुदायिक स्तर पर विवादों के समाधान की प्रक्रिया की जानकारी दी गई. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि मध्यस्थता का उद्देश्य किसी एक पक्ष को जीत दिलाना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान कराना है.

चार सत्रों में समझाई गई मध्यस्थता की प्रक्रिया

झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश तथा सदस्य सचिव रंजना अस्थाना और रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. प्रशिक्षण के पहले सत्र में सेवानिवृत्त न्यायिक पदाधिकारी रामधारी यादव और अधिवक्ता मध्यस्थ मनीषा रानी ने अलग-अलग बातचीत की प्रक्रिया के साथ मध्यस्थता के दायरे और उसकी सीमाओं की जानकारी दी. प्रतिभागियों को बताया गया कि विवाद में शामिल दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए. दूसरे सत्र में सेवानिवृत्त न्यायिक पदाधिकारी बालमुकुंद राय और दिपाली ओझा ने सक्रिय रूप से सुनने, बातचीत को संक्षेप में दोहराने और दोनों पक्षों की बात निष्पक्ष तरीके से रखने के तरीकों के बारे में बताया. वहीं तीसरे सत्र में दिपाली ओझा और मनीषा रानी ने सामुदायिक मध्यस्थ की भूमिका, शारीरिक भाषा, सहानुभूति और निष्पक्ष सवाल पूछने के तरीकों को समझाया. प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को यह बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर संवाद और आपसी सहमति के जरिए विवादों को सुलझाकर अदालतों में मुकदमों का बोझ कम किया जा सकता है.

पंचायत स्तर पर विवाद समाधान पर जोर
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त न्यायिक पदाधिकारी रामधारी यादव, बालमुकुंद राय, अधिवक्ता मध्यस्थ मनीषा रानी, दिपाली ओझा, ख्वाजा मेहनाज अहमद, एलएडीसीएस के सदस्य, पीएलवी, डालसा कर्मी तथा विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों से आए गणमान्य लोग मौजूद रहे. अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों को मुकदमे में बदलने से पहले संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान की संस्कृति को बढ़ावा देना है.
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