वेल्स क्रिकेट ग्राउंड बना सियासी अखाड़ा: सांसद-विधायक विवाद पर बीजेपी जिलाध्यक्ष की एंट्री, बोले- “यह दोनों नेताओं का व्यक्तिगत मामला”

Hazaribagh: वेल्स क्रिकेट ग्राउंड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है. क्रिकेट मैच, आमंत्रण और मंच...

Hazaribagh: वेल्स क्रिकेट ग्राउंड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है. क्रिकेट मैच, आमंत्रण और मंच साझा करने को लेकर शुरू हुई तनातनी अब भाजपा के भीतर खुली बयानबाज़ी तक पहुंच गई है. सांसद मनीष जायसवाल और विधायक प्रदीप प्रसाद के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद सिंह ने भी अपनी चुप्पी तोड़ दी है. जिलाध्यक्ष ने साफ कहा है कि यह पार्टी का नहीं, बल्कि दोनों नेताओं का “व्यक्तिगत मामला” है. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि संगठन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस विवाद की चर्चा तेज है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल वेल्स क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित क्रिकेट गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर विवाद शुरू हुआ. आरोप है कि आयोजन में राजनीतिक प्रोटोकॉल और आमंत्रण को लेकर नाराजगी सामने आई. इसके बाद विधायक प्रदीप प्रसाद की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई, जिसमें मैदान में क्रिकेट गतिविधियों को रोकने तक की चेतावनी दिए जाने की चर्चाएं सामने आईं. इसके जवाब में सांसद मनीष जायसवाल समर्थक गुट और क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और बयानबाज़ी ने पूरे मामले को और गर्मा दिया.

भाजपा संगठन ने बनाई दूरी

अब तक पार्टी संगठन इस विवाद पर खुलकर कुछ कहने से बच रहा था, लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद सिंह के हालिया बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन फिलहाल इसे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का टकराव मान रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने इस विवाद को अपने आत्मसम्मान से जोड़ लिया है. संगठन की प्राथमिकता पार्टी की छवि और कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाए रखना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिलाध्यक्ष का यह बयान पार्टी की “डैमेज कंट्रोल” रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

खेल के मैदान से राजनीति तक

हजारीबाग में क्रिकेट को लेकर पहले भी राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे सांसद और विधायक के आमने-सामने आने तक पहुंच गया. स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि खेल के मंच को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए. वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी दो धड़े बनते दिखाई दे रहे हैं. एक पक्ष सांसद के समर्थन में है तो दूसरा विधायक के रुख को सही ठहरा रहा है. अब सभी की नजर भाजपा संगठन की अगली रणनीति पर टिकी है. यदि विवाद और बढ़ता है तो पार्टी आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है. फिलहाल जिलाध्यक्ष के बयान के बाद यह संकेत जरूर मिला है कि पार्टी इस टकराव से खुद को अलग दिखाने की कोशिश कर रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद केवल क्रिकेट ग्राउंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर हजारीबाग की स्थानीय राजनीति और संगठनात्मक समीकरणों पर भी पड़ सकता है.

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