News Wave Desk: नेतृत्व केवल दफ्तर की चारदीवारी में बैठकर हुक्म चलाने का नाम नहीं है, बल्कि जब कोई प्रशासनिक अधिकारी खुद जमीन पर उतरकर प्रेरणा बनता है, तो बदलाव की इबारत खुद-बखुद लिख जाती है. वैशाली जिले की जिलाधिकारी (डीएम) वर्षा सिंह ने कुछ ऐसा ही अनूठा उदाहरण पेश किया है, जो पूरे बिहार के किसानों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है.
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल
हाल ही में वैशाली जिले में डीएम वर्षा सिंह प्रशासनिक बैठकों और औपचारिक दौरों से इतर सीधे एक ग्रामीण इलाके के धान के खेत में जा पहुंचीं. पारंपरिक परिधान और सादगी से लबरेज, उन्होंने कीचड़ से भरे खेत में कदम रखा और खुद अपने हाथों से धान के पौधे रोपे. उनका यह अंदाज सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि माटी के प्रति उनके जुड़ाव और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उनके मजबूत इरादे की बानगी थी.
किसानों से किया सीधा संवाद
डीएम वर्षा सिंह ने खेत में उतरकर किसानों को यह संदेश दिया कि अब वक्त आ गया है कि हम अपनी पुरानी और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटें. उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती के फायदों पर खुलकर चर्चा की. उन्होंने समझाया कि कैसे कम लागत में और बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बेहतर फसल ली जा सकती है.

कम लागत, बेहतर उत्पादन पर दिया जोर
किसानों में दौड़ी प्रेरणा की नई लहर जिलाधिकारी को खुद खेतों में धान रोपते देख वहां मौजूद स्थानीय किसान और ग्रामीण दंग रह गए. किसानों का कहना है कि जब जिले का मुखिया खुद खेती के तौर-तरीकों को सीखने और बढ़ावा देने के लिए जमीन पर उतर आए, तो उनकी मेहनत के प्रति सम्मान स्वतः बढ़ जाता है. इस पहल से न केवल किसानों का मनोबल बढ़ा है, बल्कि उनमें प्राकृतिक खेती अपनाने को लेकर एक नया उत्साह भी जागा है.
