Ranchi: हजारीबाग की फिज़ा में अब कोयले की धूल का गुबार और भी गहरा होने वाला है. एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के केरंडारी-ए ओपनकास्ट कोल माइन प्रोजेक्ट ने जो अपनी कोयला निकासी योजना का जो खाका खींचा है, वह आने वाले दिनों में स्थानीय निवासियों के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है. नवीनतम ‘ट्रैफिक स्टडी रिपोर्ट’ से स्पष्ट है कि हजारीबाग से लेकर चतरा तक की सड़कों अब कोयले से लदे ट्रकों के भारी दबाव होगा. इससे होने वाले प्रदूषण को लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने तेवर तल्ख कर लिए हैं.
कोयले की ट्रांसपोर्टिंग प्रतिदिन 2988 बढ़कर हो जाएगी 16000 टन
परियोजना के शुरुआती आंकड़ों को देखें तो जून 2024 में कुल कोयला परिवहन की मात्रा महज 2988 टन प्रतिदिन थी, जिसके लिए 200 ट्रकों (आना-जाना) की आवाजाही हो रही थी. दिसंबर 2024 तक यह मात्रा 7000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गई, जिसके लिए 466 ट्रकों का रेला सड़कों पर उतर आया. साल 2025 के अप्रैल तक 10,000 टन और दिसंबर तक 11,500 टन कोयला प्रतिदिन सड़क मार्ग से ढोया जाने लगा. अब साल 2026 और 2027 के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 से लेकर मार्च 2027 तक का लक्ष्य 16,000 टन प्रतिदिन का है, जिसके लिए सड़कों पर प्रतिदिन 1,070 ट्रकों का बोझ पड़ेगा.

क्या है फैक्ट फाइल
- वर्ष 2024-25: 2024 के अंत तक (दिसंबर) 7000 टन कोयले के साथ 466 ट्रकों का संचालन शुरू हो चुका था. 2025 में, मार्च तक यह आंकड़ा 9000 टन और 600 ट्रकों तक जा पहुंचा. अप्रैल 2025 में जब 10,000 टन का आंकड़ा पार हुआ, तो ट्रक संख्या 666 हो गई. साल के अंत तक (दिसंबर 2025) कोयला परिवहन बढ़कर 11,500 टन प्रतिदिन हो गया और ट्रकों की संख्या 770 तक पहुंच गई.
- वर्ष 2026: साल 2026 के जनवरी में 12,000 टन (804 ट्रक), मार्च में 12,500 टन (836 ट्रक), और अप्रैल में सीधा उछाल मारते हुए 14,500 टन (970 ट्रक) की खेप सड़कों पर दौड़ने लगी. जून 2026 तक यह मात्रा 15,000 टन तक पहुंची और ट्रकों का आंकड़ा 1004 के पार हो गया. जुलाई और अगस्त 2026 से यह प्रोजेक्ट अपने उच्चतम (पीक) स्तर पर होगा. जहां 16,000 टन कोयला प्रतिदिन उठाव होगा.
- वर्ष 2027: साल 2027 के पहले तीन महीनों (जनवरी-मार्च) तक भी 16,000 टन प्रतिदिन कोयला परिवहन और 1070 ट्रकों का परिचालन जारी रहेगा. यानी, कुल 13,012 टन अतिरिक्त कोयला हर दिन इन सड़कों पर बढेगा, जिसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्थानीय परिवेश के लिए एक गंभीर पर्यावरणीय खतरा माना है.
Read Also: कोडरमा में झाड़ियों से युवक का शव बरामद, इलाके में सनसनी
कहां जा रहा कोयला
यह कोयला सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि हजारीबाग और चतरा जिले के कई ठिकानों तक पहुंचाया जा रहा है. इसमें शिवपुर साइडिंग, बाचरा साइडिंग, कतकमसंडी साइडिंग, कुशमही साइडिंग, बिरा टोली साइडिंग, तोरी साइडिंग और नार्थ कर्णपुरा सुपर थर्मल पावर प्लांट प्रमुख हैं. सबसे ज्यादा भारी दबाव ‘शिवपुर साइडिंग’ और ‘नार्थ करणपुरा एसटीपीपी’ पर देखने को मिल रहा है. अगस्त 2026 से शिवपुर साइडिंग की ओर 6000 टन कोयला और 400 ट्रकों का आवागमन सुनिश्चित किया गया है. वहीं, एनकेएसटीपीपी के लिए 5000 टन कोयला और 334 ट्रकों की निरंतर आवाजाही तय है.
ये है ट्रांसपोर्टिंग की स्थिति
कोयला परिवहन: गंतव्य और ट्रकों का दैनिक दबाव
- शिवपुर साइडिंग: 6,000 टन कोयला प्रतिदिन — 400 ट्रक
- नार्थ कर्णपुरा एसटीपीपी: 5,000 टन कोयला प्रतिदिन — 334 ट्रक
- टोरी साइडिंग: 3,000 टन कोयला प्रतिदिन — 200 ट्रक
- बाचरा साइडिंग: 500 टन कोयला प्रतिदिन — 34 ट्रक
- कटकमसंडी साइडिंग: 500 टन कोयला प्रतिदिन — 34 ट्रक
- कुशमही साइडिंग: 500 टन कोयला प्रतिदिन — 34 ट्रक
- बिरा टोली साइडिंग: 500 टन कोयला प्रतिदिन — 34 ट्रक


