Hazaribagh: बरही के करियातपुर में 21 ट्रकों से बरामद 308 पशुओं की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है. अलग-अलग खटालों में रखे गए पशुओं में 17 भैंस के बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई बच्चे और भैंस बीमार बताए जा रहे हैं. खटालों में कीचड़, गंदगी और गर्मी के बीच पशुओं को रखा गया है. निरीक्षण के दौरान खटालों की व्यवस्था बेहद दयनीय पाई गई.

तीन खटालों में मिले 17 मृत बच्चे
नईटांड़ स्थित खटाल में 41 भैंस और 31 बच्चे रखे गए हैं. इनमें एक बच्चा मृत मिला. वहीं बरकट्ठा थाना क्षेत्र के घंघरी में दो खटालों में पशुओं को रखा गया है. एक खटाल में 40 भैंसों के बीच छह बच्चों की मौत हुई है, जबकि दूसरे खटाल में 76 भैंसों के बीच 10 बच्चे मृत मिले. इस तरह तीनों खटालों में कुल 17 भैंस के बच्चे मृत पाए गए.
पशु चिकित्सा टीम पहुंची, इलाज नहीं हो सका
पशुओं की देखरेख के लिए बरही चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ज्योति मंजूषा, पदमा चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रीता चौधरी और चौपारण चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमन कुमार की टीम गठित की गई है. बरही चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ज्योति मंजूषा टीम के साथ मौके पर पहुंचीं, लेकिन पशुओं का उपचार नहीं किया गया. उन्होंने बताया कि बरामद पशुओं की पहचान के लिए कान में टैग लगाया जाना था. पहचान स्पष्ट नहीं होने के कारण टैगिंग नहीं हो सकी. उनके अनुसार बरही थाना पुलिस के आने के बाद ही पशुओं के इलाज और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मजदूरों ने पशुओं को दुधारू बताया
पशुओं की देखरेख कर रहे मीर हसन समेत अन्य मजदूरों ने दावा किया कि बिहार-झारखंड सीमा स्थित चोरदाहा चेकपोस्ट पर पशुओं की खरीद से संबंधित कागजात दिखाने के बाद वाहनों को आगे जाने की अनुमति दी गई थी. उनका कहना है कि चौपारण थाना क्षेत्र में भी वाहनों को नहीं रोका गया, लेकिन बरही थाना क्षेत्र में प्रवेश करते ही उन्हें पकड़ लिया गया. मजदूरों के अनुसार अधिकांश पशु दुधारू हैं और उनके बच्चे भी साथ हैं. सभी वाहनों पर ‘एनिमल कैरियर’ का बोर्ड लगा था. उन्होंने आरोप लगाया कि पशुओं को कटाई के लिए नहीं ले जाया जा रहा था. मजदूरों ने चोरदाहा चेकपोस्ट पर तैनात मजिस्ट्रेट और पुलिस बल पर भी आरोप लगाए. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
इलाज और रखरखाव पर उठे सवाल
बरामद 308 पशुओं में 164 भैंस, 130 भैंस के बच्चे तथा सात गाय और उनके बच्चे शामिल हैं. पशुओं की लगातार बिगड़ती स्थिति और 17 बच्चों की मौत के बाद उनके इलाज, भोजन और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं. पशुओं को जिस स्थिति में रखा गया है, उसमें संक्रमण और बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है. ऐसे में प्रशासन और पशुपालन विभाग के सामने सभी पशुओं को तत्काल समुचित चिकित्सा, पर्याप्त भोजन, पानी और स्वच्छ जगह उपलब्ध कराने की चुनौती है.

