Bokaro: बीते कुछ समय में हाथी और इंसानों के बीच के संघर्ष के कई मामले प्रकाश में आए. हाथी व मानव के इस संघर्ष में लगातार इजाफा हो रहा है. इस साल जनवरी-फरवरी में महुआटांड थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के तीन सदस्यों सहित कई लोगों की मौत हाथियों द्वारा कुचले जाने से हो गई. ऐसे में अब हाथी और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष को देखते हुए सरकार ने हाथी विचरण क्षेत्र को इंसानी दखल से मुक्त रखने का निर्णय लिया है. इसी को लेकर हाथी कॉरिडोर बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है. स्ट्रैटेजी एंड एक्शन प्लान फॉर कंजरवेशन ऑफ कॉरिडोर के तहत बोकारो जिले में 4 कॉरिडोर को चिन्हित किया गया है. इन चारों कॉरिडोर को हाई प्रायॉरिटी में शामिल किया गया है.
कॉरिडोर को बनाया जाएगा 3 किमी चौड़ा
वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार के अनुसार जिले में पुन्नू-लुगुबुरू, पुन्नु-हिसिम-भस्की, जागेश्वर-गोस-पेंक व डुमरी-नावाडीह-चतरोचट्टी कॉरिडोर को हाथी के विचरण के लिए चिन्हित किया गया है. इन सभी कॉरिडोर को लगभग 3 किमी चौड़ा बनाया जायेगा.
बांस समेत लगाएं जाएंगे 90 प्रजातियों के पौधे
जानकारी के मुताबिक, कॉरिडोर में बांस समेत हाथियों के भोजन के लिए उपयुक्त वनस्पति विकसित किये जाएंगे. साथ ही पानी का भंडारण भी किया जायेगा. बांस के अलावा कटहल, आम, जामुन समेत 90 प्रजातियों के पौधे लगाये जाएंगे. जरूरत के हिसाब से क्षेत्र की घेराबंदी भी होगी, ताकि आम लोग उक्त क्षेत्र में नहीं आ सके. बता दें, कॉरिडोर बनाने के लिए लंबे समय से प्राइवेट एजेंसी के जरिये सर्वे का काम करवाया गया है.
कॉरिडोर के लिए दो तरीके का मास्टर प्लान बनाया गया है. जंगलों में वन्यजीवों के संभावित कॉरिडोर्स की पहचान की गई है. भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से पहले से पहचाने गए कॉरिडोर्स के अलावा नए कॉरिडोर्स को भी सैटेलाइट इमेजरी व ISRO के भुवन पोर्टल के डेटा की मदद से जोड़ा गया है. वहीं, दूसरा चरण मैदानी कामकाज के लिए है. इसके तहत हर कॉरिडोर के लिए अलग यूनिक स्टेट आईडी बनाई गई है.
तीन स्तर पर होगा कॉरिडोर
जिले के चारों कॉरिडोर्स को 3 जोन में विकसित किया जायेगा. पहला जोन अति संवेदनशील होगा. यहां वन प्रबंधन के काम बड़े पैमाने पर होंगे. दूसरा मध्यम स्तर का जोन होगा, जहां लगातार निगरानी की जायेगी. सबसे बाहर वाले क्षेत्र में न्यूनतम हस्तक्षेप होगा. बता दें कि बीते 27 जुन को 30 हाथियों का झुंड अलग-अलग हिस्सों में बंटकर गोपो, पालू, बड़की पुन्नू, कुसुमडीह के आसपास मौजूद था. इनमें दो-तीन गर्भवती हथिनी भी शामिल है.
अनदेखी के कारण कॉरिडोर निर्माण में हुई देरी
सूत्रों की मानें, तो वन व पर्यावरण मंत्रालय की ओर से 2023 में विश्व हाथी दिवस के मौके पर भारत के हाथी कॉरिडोर-2023 की रिपोर्ट पेश की गयी थी. ईस्ट सेंट्रल रिजन में झारखंड के हाथी कॉरिडोर की पहचान की गयी थी. राज्य के अंदर व दूसरे राज्य से गुजरने वाले हाथी कॉरिडोर के बारे में बताया गया था.

राज्य के अंदर 16 कॉरिडोर की पहचान की गयी थी. वहीं बंगाल व ओडिशा के साथ गुजरने वाली 4 कॉरिडोर के बारे में बताया गया था. लेकिन, इस रिपोर्ट में बोकारो जिले से होकर एक भी कॉरिडोर की पहचान नहीं की गयी थी, जबकि, बोकारो में हाथियों का विचरण लंबे समय से होता रहा है.
