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बजट की राशि से जारी हुए 77,024 करोड़, पर खर्च महज 7.9%, जमीन पर उतरे सिर्फ 10,973 करोड़ की योजनाएं

Ranchi : राज्य का कुल स्वीकृत बजट 1,38,801.77 करोड़ है. इसमें से अब तक 77,024.09 करोड़ राशि की प्रशासनिक मंजूरी दे दी...

बजट

Ranchi : राज्य का कुल स्वीकृत बजट 1,38,801.77 करोड़ है. इसमें से अब तक 77,024.09 करोड़ राशि की प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है. ट्रेजरी से भी 40,972.47 करोड़ की निकासी की जा चुकी है, लेकिन विभागों द्वारा धरातल पर वास्तविक खर्च महज 10,973.39 करोड़ ही किया गया है. यानी कुल बजट का सिर्फ 7.9 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक वास्तविक रूप से जनता के काम आ सका है. औद्योगिक विकास के लिए रखे गए 501.30 करोड़ में से सिर्फ 10.05 करोड़ का इस्तेमाल हुआ है.

जानिए किस विभाग ने तिजोरी से कितना निकाला

महिला एवं बाल विकास विभाग का अब तक का खर्च 1,216.49 करोड़ : महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को राज्य में सबसे ज्यादा 20,238.41 करोड़ का बजट मिला है. इसमें से 19,134.36 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी थी, लेकिन अब तक सिर्फ 1,216.49 करोड़ ही खर्च किए जा सके हैं.
ऊर्जा विभाग ने खर्च किए 1,876.97 करोड़ :  ऊर्जा विभाग के 11,197.89 करोड़ के कुल बजट में से अधिकारियों को 1,923.07 करोड़ का आवंटन मिला था. जिसके मुकाबले विभाग ने 1,876.97 करोड़ का वास्तविक खर्च पूरा कर लिया है.
उच्च शिक्षा विभाग ने खर्च किए 92.05 करोड़ : 9,485.01 करोड़ के कुल बजट में से 1,555.53 करोड़ का वास्तविक खर्च हुआ. माध्यमिक शिक्षा प्रभाग ने 4,909.72 करोड़ के बजट के सामने केवल 581.97 करोड़ ही खर्च हो सके हैं. उच्च शिक्षा प्रभाग ने 1,949.81 करोड़ के बजट में से महज 92.05 करोड़ जमीन पर उतरे. तकनीकी शिक्षा प्रभाग के 479.65 करोड़ के बजट में से सिर्फ 26.03 करोड़ खर्च हुए.
पुलिस पर 1,570.50 करोड़ खर्च, राहत कार्य में सिर्फ 2.75 करोड़ :  कानून व्यवस्था के लिए 8,910.06 करोड़ का बजट में से 1,570.50 करोड़ का वास्तविक खर्च किया जा चुका है. इसके विपरीत, आपदा राहत का हाल बेहाल है.1,173.47 करोड़ के बड़े बजट में से अब तक मात्र 2.75 करोड़ ही खर्च हुए हैं.
ग्रामीण कार्य 1,293 करोड़ और ग्रामीण विकास 55 करोड़ किए खर्च : ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण सड़कों के लिए तय 4,156.74 करोड़ के बजट में से 1,293.89 करोड़ का खर्च किया गया है. मुख्य मार्गों के लिए आवंटित 6,301.28 करोड़ में से सिर्फ 369.31 करोड़ खर्च हुए हैं. भवन निर्माण विभाग के 794.31 करोड़ के बजट में से मात्र 108.27 करोड़ खर्च हो सके हैं. ग्रामीण विकास विभाग का कुल बजट 7,845.93 करोड़ है, लेकिन वास्तविक खर्च के नाम पर तिजोरी से सिर्फ 55.13 करोड़ ही निकले हैं.
चिकित्सा पर 587 करोड़ और पानी पर महज 38.87 करोड़ खर्च :  राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तय 5,980.30 करोड़ के बजट में से अब तक 587.06 करोड़ का उपयोग हुआ है. हर घर जल योजना से जुड़े पेयजल विभाग का बजट 3,994.53 करोड़ है, लेकिन धरातल पर वास्तविक खर्च महज 38.87 करोड़ है.
कृषि विभाग के पांच प्रभागों ने खर्च किये सिर्फ 84.13 करोड़ : किसानों और पशुपालकों से जुड़े विभागों में खर्च की रफ्तार सबसे चिंताजनक है. कृषि प्रभाग के 2,106.36 करोड़ के कुल बजट में से मात्र 23.93 करोड़ खर्च हुए हैं. पशुपालन में 624.83 करोड़ के बजट में से सिर्फ 35.55 करोड़,सहकारिता प्रभाग के 962.11 करोड़ के बजट के मुकाबले केवल 14.33 करोड़ खर्च, मत्स्य प्रभाग के 220.17 करोड़ के कुल बजट में से महज 8.75 करोड़ खर्च और डेयरी प्रभाग के 434.58 करोड़ के बजट में से सबसे कम यानी सिर्फ 1.67 करोड़ खर्च हुए हैं.

कर्ज व ब्याज भुगतान में 53 करोड़, पेंशन मद में 0 खर्च : सरकारी कर्ज चुकाने के लिए निर्धारित 9,108.17 करोड़ में से अब तक 33.24 करोड़ का भुगतान हुआ. 6,519.96 करोड़ के बजटीय प्रावधान में से 19.95 करोड़ ब्याज के रूप में दिए गए. सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन के लिए 9,967.40 करोड़ का बजट है, लेकिन वर्तमान रिपोर्ट में इस मद में खर्च शून्य (0) दर्ज है.

पिछड़े वर्गों के लिए 44.87 करोड़ और रोजगार पर 22 करोड़ खर्च : एसटी, एससी, ओबीसी कल्याण इस प्रभाग के 2,199.22 करोड़ के बजट में से अब तक सिर्फ 44.87 करोड़ खर्च हुए हैं. अल्पसंख्यक कल्याण प्रभाग ने अपने 318.98 करोड़ के बजट में से 6.47 करोड़ खर्च किए हैं. श्रम एवं कौशल विकास के तहत युवाओं के रोजगार और प्रशिक्षण के लिए तय 1,128.73 करोड़ के बजट में से अब तक मात्र 22.12 करोड़ खर्च हुए हैं.

बड़ी सिंचाई योजनाओं पर 574 करोड़ खर्च : सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 2,121.82 करोड़ का बजट है. जिसमें से 574.27 करोड़ का खर्च हुआ है. हालांकि, इसके लघु सिंचाई प्रभाग में 392.89 करोड़ के बजट में से केवल 18.66 करोड़ ही खर्च हुए. ग्रामीण विकास और पंचायतों के लिए आवंटित 883.25 करोड़ में से अब तक 53.92 करोड़ खर्च हो सके हैं.
आईटी, पर्यटन और परिवहन को मिलाकर खर्च 15 करोड़ से भी कम : परिवहन विभाग के 348.94 करोड़ के कुल बजट में से अब तक केवल 3.47 करोड़ खर्च किए जा सके हैं. डिजिटल गवर्नेंस के लिए तय 328.99 करोड़ के बजट में से वास्तविक खर्च सिर्फ 2.45 करोड़ हुआ है. पर्यटन प्रभाग ने 170.14 करोड़ के बजट में से 9.38 करोड़ और कला-संस्कृति प्रभाग ने 191.53 करोड़ में से 6.19 करोड़ खर्च किए हैं.

अब तक की फैक्ट फाइल

• कुल स्वीकृत बजट (बाई/आरइ) : 1,38,801.77 करोड़ रुपये
• नियंत्रण अधिकारी स्तर पर स्वीकृत : 77,024.09 करोड़ रुपये
• डीडीओ स्तर पर जारी आवंटन : 46,674.78 करोड़ रुपये
• ट्रेजरी द्वारा निकाला गया आवंटन : 40,972.47 करोड़ रुपये
• अब तक हुआ वास्तविक खर्च :10,973.39 करोड़ रुपये

खर्च करने के मामले में टॉप टेन विभाग

• महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग
• गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग – गृह प्रभाग
• स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग
• ग्रामीण कार्य विभाग
• ऊर्जा विभाग
• स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग
• स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग – माध्यमिक शिक्षा प्रभाग
• जल संसाधन विभाग
• पथ निर्माण विभाग
• भवन निर्माण विभाग

 

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