कोडरमा: सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर ध्वजाधारी धाम में सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था की तैयारी तेज

Koderma: सावन माह की अंतिम सोमवारी के अवसर पर ध्वजाधारी धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जलाभिषेक के लिए पहुंचने की...

सावन की अंतिम सोमवारी

Koderma: सावन माह की अंतिम सोमवारी के अवसर पर ध्वजाधारी धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जलाभिषेक के लिए पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा, विधि-व्यवस्था एवं श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं. इसी क्रम में उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता एवं पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष ने संयुक्त रूप से ध्वजाधारी धाम का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए ध्वजाधारी धाम एवं आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ रखा जाए. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं को जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो तथा पूरे परिसर में सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. उपायुक्त ने प्रशासक, नगर पंचायत कोडरमा को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए धाम परिसर एवं आवश्यक स्थानों पर मजबूत एवं व्यवस्थित बैरिकेडिंग कराई जाए. भीड़ को नियंत्रित करने तथा श्रद्धालुओं के आवागमन को सुव्यवस्थित रखने के लिए प्रवेश एवं निकास मार्गों को भी व्यवस्थित करने का निर्देश दिया गया.

कंट्रोल रूम एवं सीसीटीवी से होगी निगरानी

उपायुक्त ने ध्वजाधारी धाम में एक कंट्रोल रूम स्थापित करने का निर्देश दिया, ताकि पूरे क्षेत्र की गतिविधियों एवं भीड़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा सके. साथ ही, महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया. उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए कंट्रोल रूम को संबंधित विभागों एवं पुलिस प्रशासन से समन्वय के साथ संचालित किया जाए.

स्वास्थ्य सुविधाओं एवं आपातकालीन सेवाओं की रहेगी व्यवस्था

श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए उपायुक्त ने धाम परिसर एवं आसपास के प्रमुख स्थानों पर मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने पर्याप्त संख्या में चिकित्सकीय टीम एवं आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा.इसके साथ ही एंबुलेंस की व्यवस्था एवं आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में त्वरित चिकित्सा एवं राहत उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखें.

दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की होगी पर्याप्त प्रतिनियुक्ति

उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ध्वजाधारी धाम एवं आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाए. भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों, प्रवेश एवं निकास मार्गों, पार्किंग स्थल तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया. पुलिस प्रशासन को भीड़ नियंत्रण एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.

वॉच टावर से भीड़ पर रखी जाएगी नजर

भीड़ की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए धाम परिसर में आवश्यक स्थानों पर वॉच टावर लगाने का निर्देश दिया गया. इसके माध्यम से भीड़ की स्थिति पर ऊंचाई से नजर रखी जाएगी, जिससे किसी भी स्थान पर अत्यधिक भीड़ होने की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाए जा सकें.

साफ-सफाई एवं मूलभूत सुविधाओं पर विशेष जोर

उपायुक्त ने पूरे ध्वजाधारी धाम परिसर में विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने का निर्देश दिया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और कहीं भी कचरा जमा न होने दिया जाए. उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा धाम परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण बनाए रखा जाए.

श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त  उत्कर्ष गुप्ता ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर ध्वजाधारी धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें, जिससे श्रद्धालु शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर सकें.

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