Hazaribagh: बड़े शहरों और महंगे शिक्षण संस्थानों से दूर रहकर भी राष्ट्रीय स्तर की सफलता हासिल की जा सकती है. इसे चौपारण की छात्रा संजीवनी शेखर पिता शशि शेखर ने साबित किया है. वर्षों की मेहनत और निरंतर अध्ययन के बल पर संजीवनी का चयन भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान एवं साइबर सुरक्षा के एकीकृत स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में बीटेक-एमटेक के लिए हुआ है. उसका चयन इस वर्ष की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई-मेन ) में प्राप्त अंकों के आधार पर हुआ है. मेरिट सूची में नाम आने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से नामांकन की अनुमति भी प्राप्त हो गई है. संजीवनी ने दसवीं तक की पढ़ाई बरही स्थित डीएवी विद्यालय से की. इसके बाद उसने चौपारण के केबीएसएस प्लस टू उच्च विद्यालय से बारहवीं की पढ़ाई पूरी की. स्थानीय स्तर पर उसने बारहवीं तक श्रीधरम क्लासेज के शिक्षक सतीश सिंह से पढ़ाई की. इसके बाद उसने ऑनलाइन माध्यम से अपनी तैयारी जारी रखी.

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संजीवनी ने साइबर सुरक्षा पर किया फोकस
संजीवनी की खासियत यह रही कि उसने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की तैयारी के लिए बड़े शहर का रुख नहीं किया. चौपारण में रहकर ही उसने नियमित अध्ययन और आत्मअनुशासन के साथ अपनी तैयारी की और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन किया. साइबर सुरक्षा को अपना अध्ययन क्षेत्र चुनकर संजीवनी ने भविष्य की एक महत्वपूर्ण चुनौती से जुड़ने का लक्ष्य तय किया है. राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के विभिन्न परिसरों में विद्यार्थियों को फोरेंसिक विज्ञान, साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीकी विषयों की विशेषज्ञ शिक्षा दी जाती है. संजीवनी की सफलता ग्रामीण क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जिन्हें लगता है कि बड़े सपनों के लिए बड़े शहर जाना जरूरी है. उसकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन प्रतिभा और मेहनत की कोई सीमा नहीं होती. चौपारण में रहकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली संजीवनी की यह सफलता क्षेत्र के विद्यार्थियों में नई उम्मीद और आत्मविश्वास पैदा करने वाली है. उसकी मेहनत ने साबित किया है कि बड़ी उड़ान के लिए जरूरी नहीं कि सफर बड़े शहर से शुरू हो, मंजिल की ओर पहला कदम अपने ही गांव-कस्बे से उठाया जा सकता है.

