झारखंड के नियमित DGP की नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त: एमिकस क्यूरी को नोट सौंपने का निर्देश

विनीत आभा उपाध्याय Delhi: देश की शीर्ष अदालत में प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में राज्यों के पुलिस महानिदेशक (DGP) की...

Supreme Court firm on the appointment of a regular DGP for Jharkhand: Directs submission of a note to the Amicus Curiae.

विनीत आभा उपाध्याय

Delhi: देश की शीर्ष अदालत में प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में राज्यों के पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अहम सुनवाई हुई. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने झारखंड राज्य में नियमित DGP की नियुक्ति के मामले को लेकर विशेष रुख अपनाया है. अदालत ने इस संबंध में केस का पूरा पेपरबुक न्याय मित्र (Amicus Curiae) को सौंपते हुए उनसे एक विस्तृत नोट जमा करने का निर्देश दिया है. इस मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत के समक्ष देश के विभिन्न राज्यों में DGP नियुक्ति और प्रकाश सिंह फैसले के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से जुड़ी अर्जियों पर विचार किया जा रहा था.

नियमित पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति का मुद्दा आया सामने 

इसी क्रम में झारखंड में नियमित पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति का मुद्दा सामने आया. जिसके बाद शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि झारखंड मामले की सभी फाइलें और दस्तावेज वरिष्ठ अधिवक्ता एवं न्याय मित्र राजू रामचंद्रन को मुहैया कराए जाएं ताकि वे इस पर अध्ययन कर अदालत को अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट और नोट पेश कर सकें. सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों ने शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक कदम उठाए हैं जबकि ओडिशा और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से भी अपने-अपने हलफनामे दाखिल कर दिए गए हैं.

अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को तय

अदालत ने सभी अंतरिम आदेशों को जारी रखते हुए मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 तय की है. गौरतलब है कि वर्ष 2006 के प्रकाश सिंह फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट नियम तय किया था कि किसी भी राज्य में कार्यवाहक DGP की नियुक्ति के बजाय संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा तैयार तीन वरिष्ठतम अधिकारियों के पैनल में से ही नियमित DGP का चयन अनिवार्य होगा. चयन के बाद अधिकारी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्षों का होना चाहिए. झारखंड में कार्यवाहक व्यवस्था या नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की जाती रही हैं. अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्याय मित्र से नोट मांगे जाने के बाद 2 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे राज्य के प्रशासनिक हलकों की निगाहें टिकी रहेंगी.

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