झारखंड सचिवालय में बहाली का झांसा देकर 43 लाख की वसूली, फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तक बांटे

रांची: राजधानी रांची में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. एक संगठित गिरोह ने झारखंड...

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झारखंड सचिवालय में बहाली का झांसा देकर 43 लाख की वसूली

रांची: राजधानी रांची में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. एक संगठित गिरोह ने झारखंड सचिवालय में नौकरी लगवाने का झांसा देकर युवाओं से करीब 43 लाख रुपये की ठगी कर ली. जालसाजी की हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने झारखंड सरकार के लेटरहेड और उप सचिव के फर्जी हस्ताक्षर वाला जॉइनिंग लेटर तक पीड़ितों को थमा दिया.

कोचिंग सेंटर से बुना गया ठगी का जाल

इस पूरे खेल की शुरुआत रांची के एक कोचिंग सेंटर के बाहर से हुई. चतरा जिले के राजपुर थाना क्षेत्र निवासी पीड़ित सुनील साह ने बताया कि करीब दो साल पहले उनकी मुलाकात गानेश्वर कुमार नायक और उसकी पत्नी रोमा कुमारी से हुई थी. आरोपियों ने खुद को रसूखदार बताते हुए दावा किया, कि उनकी पहुंच सचिवालय के बड़े अधिकारियों तक है और वे सीधे सरकारी नौकरी लगवा सकते हैं.

30 लाख में हुआ था एक पद का सौदा

प्राथमिकी के अनुसार, आरोपियों ने सुनील और उसके दोस्त रंजीत कुमार यादव को अपने घर बुलाया. वहां उन्हें झांसा दिया गया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के माध्यम से प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर उनकी सेटिंग है. प्रति उम्मीदवार 30 लाख रुपये देने की बात कही गई. आधा पैसा काम से पहले और बाकी चयन के बाद.

जालसाजों के झांसे में आकर पीड़ितों ने किस्तों में पैसे देने शुरू कर दिए. सुनील ने फोन-पे के जरिए तीन लाख रुपये भेजे, वहीं रंजीत ने नेफ्ट के माध्यम से तीन लाख रुपये ट्रांसफर किए. इसके बाद आरोपियों ने बाकायदा एकरारनामा किया और किस्तों में कुल 29 लाख रुपये ऐंठ लिए.

फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देख उड़े होश

ठगी का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. 10 जनवरी को आरोपियों ने झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग का फर्जी लेटरहेड इस्तेमाल कर पीड़ितों को नियुक्ति पत्र सौंप दिया. इस लेटर को असली दिखाने के लिए उस पर उप सचिव के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए थे. ज्वाइनिंग लेटर मिलते ही आरोपियों ने 14 लाख रुपये और वसूल लिए जब पीड़ित युवक नियुक्ति पत्र लेकर नेपाल हाउस (सचिवालय) स्थित कार्यालय पहुंचे, तो वहां के अधिकारियों ने बताया कि यह लेटर पूरी तरह फर्जी है. विभाग में ऐसी कोई बहाली नहीं हुई है. ठगी का एहसास होने पर पीड़ितों ने जब पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने मोबाइल बंद कर दिया और संपर्क काट लिया. इस मामले में सुनील साह ने 21 मार्च को रांची के रातू थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. पुलिस को साक्ष्य के तौर पर कई दस्तावेज सौंपे गए हैं.

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