ईसाई धर्म अपनाने पर खत्म हो जाएगा SC का दर्जा, नहीं लागू होगा SC/ST एक्ट: सुप्रीम कोर्ट

​नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले...

​नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले व्यक्ति ही अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा पाने के पात्र हैं. कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई या किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, तो वह अपना अनुसूचित जाति का दर्जा खो देता है और इसके परिणामस्वरूप वह SC/ST अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता.

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने चिंथाडा आनंद नामक एक पादरी द्वारा दायर अपील पर सुनाया. आनंद ने आंध्र प्रदेश में अक्काला रामिरेड्डी और अन्य पर जातिगत दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई थी. जिसके बाद आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने मई 2025 में इस FIR को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद आनंद का SC दर्जा समाप्त हो चुका है.

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धर्म परिवर्तन पर खत्म होगा SC दर्जा

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आनंद की अपील खारिज कर दी. अदालत ने अपने फैसले में धर्म और जातिगत दर्जे के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि कानूनन केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति के सदस्य माने जा सकते हैं. किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई धर्म) में परिवर्तित होने पर व्यक्ति का SC दर्जा स्वतः ही समाप्त हो जाता है. कोर्ट ने माना कि यदि किसी व्यक्ति के पास SC सर्टिफिकेट है भी, लेकिन वह ईसाई धर्म का पालन कर रहा है, तो वह सर्टिफिकेट उसे SC/ST एक्ट के तहत लाभ दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं है.

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कोर्ट का कानूनी तर्क

कोर्ट का तर्क है कि ईसाई धर्म जैसे धर्मों में सैद्धांतिक रूप से जातिगत भेदभाव का अस्तित्व नहीं माना जाता, इसलिए वहां SC दर्जे की सुरक्षा लागू नहीं होती. कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वह अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा.

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