
गढ़वा: जिले के रमकंडा प्रखंड मुख्यालय में रामनवमी के पावन अवसर पर शांति व्यवस्था भंग होने की घटना सामने आई है. बुधवार से शुरू हुआ मामूली विवाद गुरुवार की रात को हिंसक झड़प में तब्दील हो गया, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग और आंसू गैस के गोलों का सहारा लेना पड़ा.

जाने कैसे बिगड़े हालात?
जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत बुधवार शाम से ही हो गई थी.जब कौआखोह स्थित शिव चबूतरा के पास महावीर पताका स्थापित करने को लेकर दो पक्षों में ठन गई थी. इस विरोध के कारण गुरुवार सुबह स्थानीय लोगों ने करीब छह घंटे तक सड़क जाम रखा. प्रशासन के हस्तक्षेप और तत्कालीन थाना प्रभारी को हटाए जाने के आश्वासन के बाद जाम समाप्त हुआ था, हालांकि गुरुवार शाम को जब रामनवमी की अष्टमी का जुलूस दोबारा उसी स्थान शिव चबूतरा पर पहुंचा, तो दूसरा पक्ष फिर से विरोध पर उतर आया. देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए.तीखी नोकझोंक के बाद अचानक पथराव शुरू हो गया, जिससे जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच भगदड़ मच गई.
कई पुलिसकर्मी को आई चोट थाना प्रभारी हुए लाइन हाजिर:
घटना की सूचना मिलते ही डीआईजी किशोर कौशल और गढ़वा एसपी अमन कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला. प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है.कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में रमकंडा थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है.
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के 19 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है. साथ ही घटना में शामिल 18 वाहनों को जब्त किया गया है. उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने तीन आंसू गैस के गोले दागे, जिसके बाद जुलूस को वापस लौटना पड़ा. इस हिंसक झड़प में छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. साथ ही, हिंदू समुदाय के कई लोगों को भी चोटें आई हैं. घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
