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न्यूज वेव एक्सपोजः खनन में लगे 1.54 लाख वाहनों में से एक भी सिंक्रोनाइज़्ड नहीं, 2300 से ज्यादा वाहन ब्लैकलिस्टेड

Ranchi: राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार राज्य में माइनिंग के लिए रजिस्टर्ड डेढ़ लाख से अधिक वाहनों में से एक भी...

Ranchi: राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार  राज्य में माइनिंग के लिए रजिस्टर्ड डेढ़ लाख से अधिक वाहनों में से एक भी वाहन परिवहन विभाग के डेटाबेस से पूरी तरह सिंक नहीं है. आइए, पोर्टल के इन अचूक और अचंभित करने वाले आंकड़ों की कढ़ी परत-दर-परत चीर-फाड़ करते हैं. जेआइएमएमएस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हर माइनिंग गाड़ी का डेटा परिवहन विभाग के ‘वाहन’ डेटाबेस से 100% मैच यानी सिंक्रोनाइज़्ड होना अनिवार्य है ताकि जाली नंबर प्लेट, बिना फिटनेस और बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियां माइनिंग चालान न निकाल सकें.पूरे के पूरे 1,54,507 वाहन ‘नॉट सिंक्रोनाइज़्ड’ की श्रेणी में दौड़ रहे हैं.

व्हीकल पिन का गणित: 15,000 से अधिक गाड़ियां अब भी अंधेरे में

परिवहन विभाग ने 1,39,436 वाहनों के लिए व्हीकल पिन तो जनरेट कर दिया है, लेकिन 15,071 गाड़ियां ऐसी हैं जिनका पिन आज तक जनरेट नहीं हो सका है. बिना पिन जनरेशन के इन गाड़ियों की जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल निगरानी असंभव है. इसके बावजूद ये 15 हजार से ज्यादा गाड़ियां किसके आदेश पर और किसके रसूख के दम पर माइनिंग क्षेत्रों में धड़ल्ले से एंट्री पा रही हैं.

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2,359 वाहन ब्लैकलिस्टेड

खनन में लगे 2,359 वाहनों को ब्लैकलिस्टेड  कर दिया गया है. नियमों के उल्लंघन, ओवरलोडिंग, जाली चालान के इस्तेमाल या अवैध परिवहन के कारण इन गाड़ियों को रेड फ्लैग किया गया है. 

हर दिन 50,000 से अधिक वाहनों का ट्रांजिट पास

राज्यभर में हर 24 घंटे के भीतर औसतन 50,000 से 65,000 के बीच डिजिटल माइनिंग चालान जारी किए जा रहे हैं. कोयला, लोहा और गिट्टी-बालू के परिवहन में 1.2 लाख से अधिक भारी वाणिज्यिक वाहन (हाइवा, डंपर, ट्रक) पंजीकृत हैं. परिवहन विभाग के ‘वाहन’ डेटाबेस के साथ जेआइएमएमएस पोर्टल का रियल-टाइम मिलान का प्रतिशत 82% दर्ज किया गया है. इसका मतलब है कि अभी भी 18% गाड़ियां तकनीकी रडार से आंशिक रूप से बाहर हैं.

25,000 से अधिक वाहनों की फाइलें डंप

राज्यभर के विभिन्न जिलों में 25,600 से अधिक वाहनों के माइनिंग रजिस्ट्रेशन और जीपीएस लिंकिंग के आवेदन ‘पेंडिंग’ श्रेणी में धूल फांक रहे हैं.नियमों के मुताबिक आवेदन के 48 घंटे के भीतर वेरिफिकेशन होना अनिवार्य है, लेकिन डेटा बताता है कि 40% से अधिक मामले पिछले 30 दिनों से ठंडे बस्ते में पड़े हैं. परिवहन विभाग के डेटाबेस से मिलान के दौरान 8,400 से अधिक वाहनों का डेटा ‘मिसमैच’ (अमान्य) पाया गया है. 

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धनबाद-चतरा टॉप पर, संथाल परगना में सुस्ती

  • कोयला बेल्ट (धनबाद, चतरा, रामगढ़): कुल जारी होने वाले माइनिंग चालान में अकेले इन तीन जिलों की हिस्सेदारी 55% से अधिक है. चतरा के आम्रपाली और मगध कोलियरी क्षेत्रों से रोजाना औसतन 18,000 से अधिक चालान जनरेट हो रहे हैं.
  • लोहा अयस्क क्षेत्र (पश्चिमी सिंहभूम): यहां कुल पंजीकृत माइनिंग वाहनों का सिंकिंग रेट सबसे बेहतर यानी 91% है, जो कॉरपोरेट माइनिंग के कारण है.
  • पत्थर और बालू अंचल (पाकुड़, साहिबगंज, दुमका): यहां मैनुअल एंट्री और नेटवर्क फेलियर के नाम पर चालान जनरेशन में 15% तक की गिरावट देखी गई है.

 क्या है फैक्ट फाइल

  • कुल पंजीकृत वाहन-1,54,507
  • जनरेटेड व्हीकल पिन-1,39,436
  • लंबित व्हीकल पिन-15,071
  • पूरी तरह सिंक्रोनाइज़्ड वाहन-0
  • नॉन-सिंक्रोनाइज़्ड वाहन-1,54,507
  • ब्लैकलिस्टेड गाड़ियां- 2,359
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