हजारीबाग: कटकमसांडी प्रखंड क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार इन दिनों कछुआ चाल से भी धीमी नजर आ रही है. सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे लोगों में निराशा और आक्रोश बढ़ रहा है.
‘प्रतिशत’ का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अंचल कार्यालय हो या प्रखंड कार्यालय, हर जगह ‘प्रतिशत’ का खेल हावी है, जो विकास की गति को बाधित कर रहा है.
फाइलों की लंबी प्रक्रिया
बताया जाता है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं, दाखिल-खारिज, रसीद निर्गत और भूमि जांच प्रतिवेदन से जुड़ी फाइलों को अंतिम रूप देने से पहले कई टेबलों से गुजरना पड़ता है. इस प्रक्रिया में बड़ा बाबू, छोटा बाबू, मझला बाबू, लेखा प्रबंधक और अधिकारी शामिल रहते हैं. हर स्तर पर प्रतिशत तय होने की चर्चा आम है.
Also Read: सरकारी खर्चों का पक्का हिसाब अधूरा, कोषागार में 96.71 करोड़ के डीसी बिल लंबित
नहीं देने पर फाइल लंबित
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति या संवेदक इस व्यवस्था के तहत प्रतिशत देने को तैयार नहीं होता, तो उसकी फाइल जानबूझकर लटका दी जाती है. इससे लोगों को बार-बार प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं.
ग्रामीण और ठेकेदार परेशान
इस स्थिति से आम जनता और छोटे ठेकेदार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
योजनाएं अधूरी
विकास योजनाओं में देरी का असर गांवों की बुनियादी सुविधाओं पर पड़ रहा है. सड़क, पानी, आवास और अन्य परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं. कई जगह अधूरे काम लोगों के लिए समस्या बने हुए हैं.
जांच की मांग
स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि इस ‘सिंडिकेट व्यवस्था’ पर रोक नहीं लगी, तो विकास कागजों तक ही सीमित रह जाएगा. उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
पारदर्शिता की जरूरत
लोगों की मांग है कि सरकार डिजिटल मॉनिटरिंग, समयबद्ध कार्य प्रणाली और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र लागू करे, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके.
