झारखंड के खनन राजस्व में ऐतिहासिक उछाल : वसूली 18,500 करोड़ के पार

Ranchi: झारखंड के खान एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. राज्य के सभी 24...

Ranchi: झारखंड के खान एवं भूतत्व विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. राज्य के सभी 24 जिलों के जिला खनिज कार्यालयों (डीएमओ) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, खनिज राजस्व और सेस के रूप में कुल 18,508 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड वसूली की गई है. इसमें राजस्व वसूली से कुल 11504 करोड़ का और झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड (जेएमबीएल) सेस के रूप में राज्य सरकार के पास 7,454.30 करोड़ आए हैं. राजस्व संग्रह के मामले में चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम जिला) सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. चाईबासा ने अकेले 2,366.10 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है, जो पूरे राज्य में सर्वाधिक है. इसके साथ ही, यहां से 1,009.73 करोड़ का जेएमबीएल सेस भी प्राप्त हुआ है. कोयलांचल का मुख्य केंद्र धनबाद दूसरे स्थान पर रहा, जहां से 1,682.31 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, हालांकि सेस संग्रह के मामले में धनबाद ने चाईबासा को पीछे छोड़ते हुए 1,102.13 करोड़ हासिल किया है. पाकुड़ और हजारीबाग भी शीर्ष राजस्व देने वाले जिलों में शामिल है. पाकुड़ से 1,387.79 करोड़ और हजारीबाग से 1,227.89 करोड़ का राजस्व मिला है.

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सिमडेगा, कोडरमा और जामताड़ा का राजस्व वसूली में योगदान कम

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कुछ जिलों में राजस्व संग्रह की स्थिति काफी धीमी रही. इसमें सिमडेगा (11.10 करोड़), कोडरमा (14.50 करोड़) और जामताड़ा (15.73 करोड़) की राजस्व वसूली हुई. चाईबासा, धनबाद, पाकुड़ और हजारीबाग जैसे जिलों से प्राप्त भारी राजस्व यह स्पष्ट करता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है.

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आठ जिलों सहित निदेशालय में सेस की वसूली शून्य

राज्य के आठ जिलों सहित निदेशालय ऐसे है, जहां जेएमबीएल सेस की वसूली शून्य हुई है. इसमें सरायकेला-खरसावां, कोडरमा, गढ़वा, खूंटी, सिमडेगा, जामताड़ा, साहेबगंज और दुमका सहित खान निदेशालय, हजारीबाग स्थित स्टेट जियोलॉजिकल लेबोरेटरी, भूतत्व निदेशालय शामिल है. बता दें कि झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड (जेएमबीएल) उपकर (सेस) अधिनियम राज्य सरकार द्वारा खनिज क्षेत्रों से राजस्व बढ़ाने के लिए लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है. यह अधिनियम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया जिसमें राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति दी गई थी.

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