गिरिडीह: जिले में एक बार फिर ओपन कास्ट कोल माइनिंग शुरू होने जा रही है, जिसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं. संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल माह से खनन कार्य विधिवत शुरू हो जाएगा. इस खबर के सामने आते ही पूरे इलाके में उत्साह और उम्मीद का माहौल बन गया है. लंबे समय से रोजगार के अभाव से जूझ रहे स्थानीय लोगों को अब अपने ही क्षेत्र में काम मिलने की आस बंधी है.

पलायन में कमी की उम्मीद
पिछले कुछ वर्षों से खनन कार्य ठप रहने के कारण गिरिडीह के हजारों मजदूरों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों—जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पंजाब—की ओर पलायन करना पड़ा था. इससे न सिर्फ परिवार बिखरते रहे, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समस्याएं भी बढ़ती गईं. लेकिन अब ओपन कास्ट माइंस के दोबारा चालू होने से इस स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है.
परियोजना का विवरण

गिरिडीह सीसीएल के महाप्रबंधक गिरीश चंद्र राठौर ने बताया कि यह ओपन कास्ट परियोजना आकार और उत्पादन क्षमता के लिहाज से कब्रीबाद माइंस से भी बड़ी है. परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयनित ठेकेदार द्वारा बैंक गारंटी जमा कर दी गई है. सभी तकनीकी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अप्रैल महीने में कार्य शुरू कर दिया जाएगा. परियोजना शुरू होते ही चरणबद्ध तरीके से स्थानीय लोगों को रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू होगी.
रोजगार के अवसर

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य शुरू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर सृजित होंगे. खदानों में मजदूरी, मशीन ऑपरेटर, सुपरवाइजर जैसे कार्यों के अलावा लोडिंग, ट्रांसपोर्टिंग, सुरक्षा, मेंटेनेंस और सप्लाई चेन से जुड़े कई क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ेगा. इसके साथ ही छोटे-छोटे व्यवसाय—जैसे चाय-पान की दुकानें, ढाबे, किराना स्टोर, वाहन मरम्मत की दुकानें—भी तेजी से विकसित होंगे, जिससे स्थानीय बाजार में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी.
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता
ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई है कि परियोजना में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और बाहरी मजदूरों की जगह पहले गिरिडीह के बेरोजगारों को काम दिया जाए. उनका कहना है कि यदि ऐसा किया गया, तो पलायन की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है और जिले का संतुलित विकास संभव हो सकेगा.
पर्यावरण संरक्षण का ध्यान

कुछ सामाजिक संगठनों ने पर्यावरणीय पहलुओं पर भी ध्यान देने की अपील की है. उनका कहना है कि खनन कार्य के दौरान धूल, प्रदूषण और जल स्रोतों पर असर पड़ सकता है, इसलिए प्रशासन को चाहिए कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे.
आर्थिक पुनरुत्थान की संभावना

कुल मिलाकर, गिरिडीह में ओपन कास्ट कोल माइनिंग की दोबारा शुरुआत को जिले के आर्थिक पुनरुत्थान के रूप में देखा जा रहा है. यदि योजनाओं का सही क्रियान्वयन हुआ और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिली, तो यह परियोजना न सिर्फ रोजगार बढ़ाएगी, बल्कि जिले की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी.
