Gumla: झारखंड का गुमला जिला एक ऐसा आदिवासी जिला है जहां की 80 फीसदी आबादी सरकारी अस्पताल के भरोसे है. यहां रहने वाले लोग शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से सरकारी व्यवस्था पर ही आश्रित हैं. हेमंत सोरेन की सरकार दूसरी बार सत्ता में आई तो लोगों की उम्मीद जगी थी कि स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाई जायेगी, लेकिन उसके बाद भी गुमला जैसे आदिवासी बहुल इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था आज तक बेहतर नहीं हो पाई है. गुमला जिला के विभिन्न इलाकों में रहने वाले लोग मेडिकल के लिए पूरी तरह से सदर अस्पताल पर आश्रित होते हैं. प्रसव की समस्या हो या किसी अन्य तरह की समस्या, लोग सदर अस्पताल में ही इलाज करवाने आते हैं. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 13 लाख से अधिक की आबादी वाले इस जिले के सदर अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे है.
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300 बेड का था प्रस्ताव, वर्तमान में 100 बेड
गुमला जिला में बने सदर अस्पताल का भवन शुरुआती दौर में 300 बेड वाले भवन के रूप में बनाए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन इस भवन में अब तक केवल 100 बेड ही हैं. इसके कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सामान्य दिनों में भी बेड के अभाव में मरीज को सदर अस्पताल के बरामदे में रखा जाता है. हालांकि सदर अस्पताल में मौजूद डॉक्टर और अन्य कर्मी अपनी ओर से सेवा देने में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं. सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ शंभू नाथ चौधरी हों या फिर उपाधीक्षक डॉ अनुपम किशोर, दोनों की कार्यशैली को लेकर किसी प्रकार से सवाल नहीं खड़े किए जा सकते हैं. दोनों पूरी ताकत के साथ सदर अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर करने में जुटे हुए हैं. सिविल सर्जन शंभूनाथ चौधरी भी कई बार इस बात को उठा चुके हैं कि सदर अस्पताल में स्थान का अभाव निश्चित रूप से उनके लिए एक चुनौती बनकर हमेशा खड़ा हो जाता है. उन्होंने बताया कि जल्द ही अस्पताल के भवन का विस्तार होगा. वहीं उपाध्यक्ष डॉ अनुपम किशोर की मानें तो तमाम समस्याओं के बीच प्रयास होता है कि गुमला सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर से बेहतर सेवा दी जा सके. उन्होंने बताया कि गुमला की डीसी प्रेरणा दीक्षित की ओर से भी सदर अस्पताल को नियमित रूप से सहयोग मिलता रहा है. डीसी ने कई बार सदर अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए कई कदम उठाये.
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सांसद-विधायक पर उदासीनता का आरोप
उन्होंने बताया कि एक समय था कि सदर अस्पातल में निर्धारित समय के लिए दवा का काउंटर खुलता था, लेकिन अब 24 घंटे लोगों को दवा उपलब्ध हो जाती है. साथ ही साथ किसी प्रकार के जांच के लिए कोई दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है. इसके कारण सदर अस्पताल के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है. उन्होंने बताया कि सदर अस्पताल में प्रसव के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं आती हैं. उन्हें बेहतर सेवा देने की कोशिश की जाती है. इन सब के बीच जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान में गुमला जिला के तीनों विधायक सत्ताधारी दल से जुड़े हुए हैं. साथ ही यहां के सांसद सुखदेव भगत भी कांग्रेस पार्टी से आते हैं. इसके बावजूद सदर अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए सरकार की ओर से कोई सार्थक पहल नहीं हो पाया, जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं.
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी से सुविधा बढ़ाने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि सूबे की सरकार में मौजूद स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी लगातार यह दावा करते हैं कि आदिवासियों के स्वास्थ्य को लेकर वह काफी गंभीर हैं, लेकिन उनके ध्यान में गुमला का सदर अस्पताल क्यों नहीं आ पाता है. यह काफी चिंता का विषय है. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने डॉक्टर इरफान अंसारी से मांग की है कि वह गुमला जिला का दौरा करें और सदर अस्पताल की स्थिति को बेहतर करने के लिए सरकार की ओर से सार्थक पहल करें. सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि गुमला सदर अस्पताल में डॉक्टरों की जो क्षमता होनी चाहिए, उससे कम डॉक्टर होने के कारण भी सदर अस्पताल की व्यवस्था को लेकर कई बार सवाल खड़े किए जाते हैं. गुमला सदर अस्पताल से कई मरीजों को रांची रेफर कर दिया जाता है जिससे मरीज के परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. अगर उन मरीजों का इलाज यहां के डॉक्टर के द्वारा ही सही रूप से किया जाए तो निश्चित रूप से मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा. इन तमाम समस्याओं को देखते हुएआम लोगों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि अगर सदर अस्पताल की व्यवस्था को बेहतर कर दिया जाए तो इस सरकार के द्वारा गुमला को यह बहुत बड़ी सौगात होगी.
