SAURAV SINGH

रांची: झारखंड के आपराधिक इतिहास में कुछ ऐसी वारदातें दर्ज हैं जिन्होंने सत्ता, प्रशासन और कानून व्यवस्था तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया. इन घटनाओं ने सिर्फ राजनीतिक गलियारों को ही नहीं हिलाया, बल्कि आम जनता के मन में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गहरा भय भी पैदा किया.डिप्टी मेयर नीरज सिंह, वार्डन सुचित्रा मिश्रा और गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव. तीन अलग नाम, तीन अलग पृष्ठभूमि, लेकिन अंजाम एक जैसा. सनसनीखेज हत्या और फिर अदालत में साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों की रिहाई. सालों बीत गए, लेकिन एक सवाल आज भी अनसुलझे है. आखिर इन हत्याओं का असली गुनहगार कौन है.
नीरज सिंह हत्याकांड: AK-47 50 गोलियां फायर पर हत्यारा अब भी अज्ञात

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घटना: 21 मार्च 2017
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स्थान: स्टील गेट, सरायढेला, धनबाद
धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था. वह अपनी फॉर्च्यूनर गाड़ी से घर लौट रहे थे. जैसे ही वाहन स्पीड ब्रेकर पर धीमा हुआ, हमलावरों ने चारों तरफ से AK-47 से ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं.पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर से 17 गोलियां निकाली गईं. घटनास्थल से 50 से अधिक राउंड फायरिंग के साक्ष्य मिले. यह हमला पूरी तरह योजनाबद्ध और पेशेवर अंदाज में किया गया था. शुरुआत में पुलिस ने इसे राजनीतिक और पारिवारिक रंजिश का मामला बताया. कई गिरफ्तारियां भी हुईं. लेकिन आठ साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कई प्रमुख आरोपियों को बरी कर दिया. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले शूटर और उनके कथित आका आखिर कानून की पकड़ से बाहर कैसे रह गए.
सुचित्रा मिश्रा हत्याकांड, बिखरी जांच और अधूरा इंसाफ

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घटना: 11 मई 2012
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स्थान: धुर्वा डैम रोड, रांची
ऑक्सफोर्ड स्कूल की वार्डन सुचित्रा मिश्रा की बेरहमी से हत्या ने राजधानी रांची को झकझोर दिया था. शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे लूटपाट के दौरान हुई हत्या करार दिया. लेकिन जैसे-जैसे मामला अदालत पहुंचा, पुलिस की कहानी कमजोर पड़ती गई. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जांच एजेंसी ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रही. महत्वपूर्ण गवाहों को प्रभावी ढंग से पेश नहीं किया गया. घटनास्थल से ऐसा कोई निर्णायक सबूत बरामद नहीं हुआ जो आरोपियों की संलिप्तता सिद्ध कर सके. सात वर्षों तक चली सुनवाई के बाद सभी छह आरोपी बरी हो गए. सुचित्रा मिश्रा के परिजनों के लिए न्याय आज भी एक अधूरी उम्मीद बना हुआ है.
सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड. कोर्ट परिसर में गोलीबारी, फिर भी आरोप साबित नहीं

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घटना: 2 जून 2015
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स्थान: हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर
गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव की हत्या हजारीबाग सिविल कोर्ट परिसर के अंदर हुई. वह पुलिस कस्टडी में थे. अदालत परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर AK-47 से हमला हुआ. इस घटना ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. 2020 में निचली अदालत ने पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. लेकिन जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो न्यायालय ने साक्ष्यों की कमी का हवाला देते हुए सभी दोषियों को बरी कर दिया. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि गिरफ्तार किए गए आरोपी ही असली हमलावर थे.

