Ranchi: चाईबासा के ब्लड बैंक में बच्चों को HIV संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गयी है. एक करोड़ रूपया मुआवजा की मांग की गयी है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश आनंदा सेन की अदालत ने मुआवजे की मांग पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है. कहा कि राज्य सरकार बताए कि वह पीड़ित बच्चों को कितना मुआवजा दे सकती है. साथ ही कहा कि यह हमें सुनिश्चित करना होगा कि संक्रमित बच्चे एवं परिजनों के साथ भेदभाव ना हो. वे सामान्य रूप से अपना जीवन-यापन कर सकें. वहीं बच्चे को शिक्षा की सुविधा मिले. डालसा सचिव को यह निर्देश दिया गया कि पीड़ित बच्चे और उनके परिजनों का जीवन अच्छे से चले, इसके लिए उन्हें मदद दी जाय.
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सरकार ने कहा- हर संभव दिया जा रहा सहयोग
इस पर राज्य सरकार ने बताया कि उनके परिजनों को यथा संभव सहयोग दिया जा रहा है. परिजनों को रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार प्रयासरत है. इस दौरान पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन और चाईबासा के डालसा सचिव वर्चुअली कोर्ट में उपस्थित रहे. दरअसल याचिका के अनुसार, ये सभी 5 बच्चे (उम्र 5 से 7 वर्ष) एड्स से पीड़ित हैं और उन्हें नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. अक्टूबर 2025 में ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान कथित लापरवाही के कारण ये बच्चे HIV से संक्रमित हो गए थे. पीड़ित बच्चे पश्चिमी सिंहभूम तथा सरायकेला-खरसावां जिलों के अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) परिवारों से आते हैं. परिवार अत्यंत गरीब हैं और दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं.
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एक बच्चे में जानबूझकर संक्रमित खून चढ़ाने का आरोप
इन 5 बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा में सुरक्षित रक्त चढ़ाने, एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART), नियमित CD4 और वायरल लोड जांच, पोषण सहायता और मनोसामाजिक काउंसलिंग की मांग शामिल है. साथ ही प्रभावित परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने और एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने की भी मांग की गई है. याचिका में एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि एक बच्चे को जानबूझकर संक्रमित रक्त चढ़ाया गया. मामले में संबंधित बच्चे के माता-पिता HIV नेगेटिव पाए गए हैं, जिससे संदेह और गहरा हो गया है. एक बच्चे के मामले में आरोप है कि ब्लड बैंक की एक कर्मचारी ने व्यक्तिगत रंजिश में जानबूझकर संक्रमित खून चढ़ाया.
