रांची: झारखंड की एक बड़ी आबादी आंख की बीमारी से ग्रस्त है. स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय नेत्र यंत्रण कार्यक्रम की रिर्पोट के अनुसार झारखंड में लगभग 5 लाख से अधिक लोग मोतियाबिंद के बैकलॉग या शुरुआती लक्षणों से ग्रसित हैं. नेशनल सर्वे के अनुसार, झारखंड के कुछ जिलों में 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 16.26 फीसदी लोगों में किसी न किसी स्तर का दृष्टि दोष पाया गया है. राज्य में अंधेपन के मुख्य कारणों में मोतियाबिंद (66.2 फीसदी ), कॉर्नियल ओपेसिटी (7.4 फीसदी), और ग्लूकोमा (5.5 फीसदी) शामिल हैं.
क्या कर रही है राज्य सरकार
सरकार ने प्रति वर्ष लगभग 1.5 लाख से 2 लाख मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य रखा है ताकि बैकलॉग को खत्म किया जा सके. सरकारी अस्पतालों और अनुबंधित एनजीओ के माध्यम से मोतियाबिंद का निशुल्क ऑपरेशन और लेंस प्रत्यारोपण किया जा रहा है. सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों में मोबाइल वैन और स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए जांच शिविर लगाए जा रहे हैं. बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चों की आंखों की जांच कर उन्हें मुफ्त चश्मा वितरित किया जा रहा है, क्योंकि डिजिटल स्क्रीन के बढ़ते उपयोग से बच्चों में मायोपिया के मामले बढ़े हैं.
