Hazaribagh : जिले में भूमि म्यूटेशन की प्रक्रिया गंभीर प्रशासनिक संकट का रूप लेती जा रही है. जिले के 16 अंचलों में कुल 7,348 म्यूटेशन मामले लंबित हैं. जिनमें बड़ी संख्या ऐसे आवेदनों की है जो दो, तीन नहीं बल्कि चार माह से भी अधिक समय से लंबित पड़े हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 2,100 आवेदन 30 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं. जबकि करीब 3,400 आवेदन 90 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी निष्पादित नहीं हो सके हैं. यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार और मुख्यमंत्री स्तर से म्यूटेशन मामलों के त्वरित निष्पादन के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं.

सदर और कटकमदाग में सबसे ज्यादा लंबित मामले
अंचलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे खराब स्थिति सदर अंचल की है. जहां 1,962 मामले लंबित हैं. इसके बाद कटकमदाग में 1,256, इचाक में 799, कटकमसांडी में 737, बड़कागांव में 531, विष्णुगढ़ में 421, केरेडारी में 297, बरकट्ठा में 228, चौपारण में 228, पदमा में 223 और बरही में 203 मामले लंबित हैं. कई अंचलों में लंबित मामलों की संख्या यह दर्शाती है कि आवेदन निपटाने की गति मांग के अनुरूप नहीं है.
चार माह से ज्यादा पुराने मामलों पर उठ रहे सवाल
कई म्यूटेशन आवेदन 120 दिन से अधिक समय से लंबित हैं. आवेदकों को बार बार अंचल कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है. कई मामलों में सुनवाई की तारीखें बढ़ती रहती हैं और फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहती हैं. भूमि संबंधी मामलों के जानकारों का कहना है कि म्यूटेशन में देरी का सीधा असर जमीन की खरीद बिक्री, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और राजस्व अभिलेखों के अद्यतन होने पर पड़ता है. देरी बढ़ने से भूमि विवादों की आशंका भी बढ़ जाती है. ऐसे में परेशान ग्रामीणों का आरोप है कि जान बूझकर म्यूटेशन प्रक्रिया में देर की जाती है. ऑनलाइन म्यूटेशन प्रक्रिया होने के बाद भी अकारण देरी से लोगों में असंतोष है.
कटकमदाग की घटना ने खोली थी व्यवस्था की पोल
म्यूटेशन प्रक्रिया में देरी का सबसे चर्चित उदाहरण कटकमदाग अंचल में सामने आया था. यहां एक युवक का आवेदन करीब छह माह तक लंबित रहने से वह इतना परेशान हो गया कि अपनी मांगों को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया. युवक का आरोप था कि बार बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगाने के बावजूद उसके आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है. यह मामला जब व्यापक चर्चा में आया और मुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंचा, तब प्रशासन हरकत में आया. कुछ ही घंटों के भीतर संबंधित म्यूटेशन मामले की सुनवाई कर उसका निष्पादन किया गया. इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि यदि आम नागरिक को न्याय पाने के लिए टावर पर चढ़ना पड़े, तो व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है.
10 जून को होगी समीक्षा, अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
म्यूटेशन मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने 10 जून को समीक्षा बैठक बुलाने का निर्णय लिया है. जानकारी के अनुसार सबसे अधिक लंबित मामलों वाले अंचलों की विशेष समीक्षा की जाएगी. यदि संतोषजनक प्रगति नहीं मिली तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है.
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