Ranchi: बोकारो से अक्टूबर 2020 से लापता 14 वर्षीय नाबालिग के मामले में मां उषा झा द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायाधीश प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान CID एवं पिंड्राजोड़ा थाना में दर्ज मामले के अनुसंधानकर्ता अदालत में सशरीर उपस्थित रहे. मौके पर बोकारो SP और SIT टीम भी मौजूद रही.

अप्रैल में CID को सौंपा गया था मामला
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में मामले की जांच के लिए केस CID को हस्तांतरित किया गया था. इस पर CID की ओर से बताया गया कि 5 मई को केस दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया है. मौके पर उपस्थित CID इंस्पेक्टर से अदालत ने पूछा कि अब तक मामले में क्या जांच की गई है.
केस डायरी पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अदालत ने केस डायरी देखने के बाद टिप्पणी की कि स्थानीय पुलिस ने अपने अनुसंधान में जो बातें दर्ज की थीं, लगभग वही बातें CID की केस डायरी में भी पाई गई हैं. खंडपीठ ने कहा कि आखिर ऐसी स्थिति में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को क्यों नहीं सौंप दी जानी चाहिए.
CID एडीजी तलब
इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत से आग्रह किया कि सरकार इस संबंध में CBI से आवश्यक परामर्श करना चाहती है. इसके बाद अदालत ने मामले की जांच CBI को सौंपने पर निर्णय लेने से पहले CID के एडीजी को तलब किया.
खंडपीठ ने सख्त लहजे में कहा कि काफी समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस और CID दोनों के हाथ अब तक खाली हैं. ऐसी स्थिति में मामले के खुलासे को लेकर अब CBI से ही उम्मीद की जा सकती है.
9 जून को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 9 जून को निर्धारित की है. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि CID एडीजी अदालत के समक्ष क्या पक्ष रखते हैं और मामले की जांच को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है.
