अदालत ने जताया अंदेशा कहा – ये एक डील की तरह, क्लीनचीट दो और जेल से बाहर निकलो

Ranchi : बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंदी महिला से यौन उत्पीड़न मामले में दर्ज स्वतः संज्ञान पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई. जहां मामले में राज्य सरकार के की ओर से अदालत को यह बताया गया कि मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 दिनों में जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश किया गया है. जहां बताया गया कि पूरे मामले की जांच की गई. मामला पूरी तरह अफवाह है. जिस बंदी महिला से जुड़ी घटना की बात की जा रही है उसने लिखित में बयान देकर यह कहा है कि उसके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ. वहीं अदालत को बताया गया कि महिला को वेकेशन कोर्ट से जमानत भी मिल गई है.
कोर्ट ने कहा सबको दिया जा रहा क्लीन चीट
यह सुनकर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई. खंडपीठ ने कहा कि यह तो ऐसे हैं जैसे सबको क्लीन चीट दिया जा रहा हो. अदालत ने अंदेशा जताया कि महिला बंदी को जेल से छोड़ने के बदले उसका स्वीकारोक्ति बयान लिया गया हो. इसमें साफ जाहिर हो रहा है कि सब को क्लीन चीट दिया जा रहा है. वहीं अदालत ने कहा कि जब मामला इतना संवेदनशील है और जांच की प्रक्रिया चालू है ऐसे में खंडपीठ को यह जानकारी देनी चाहिए थी. वहीं इजाजत भी लेने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं करने पर जतायी नाराजगी
अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर भी नाराजगी जतायी. अदालत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलें में अब तक मेडिकल रिपोर्ट पेश नहीं की गई है. जहां राज्य सरकार के अधिवक्ता की ओर से बताया गया की जमानत मिलने के कारण देरी हो रही है. अदालत ने ज्यूडिशल इंक्वेरी की रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट अगली सुनवाई तक अदालत में पेश करने को कहा. अगली सुनवाई 17 जून निर्धारित की गई है.
