Ranchi: कल्पना सोरेन के असम चुनावी दौरे ने असम के चाय बागान क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है. उनके हक और सम्मान के नारे ने स्थानीय श्रमिकों और आदिवासियों के बीच एक नई उम्मीद जगाई है, जो आने वाले चुनाव परिणामों में निर्णायक साबित हो सकती है. जेएमएम फायरब्रांड नेता कल्पना सोरेन ने असम के औरंगाजुली चाय बागान और मज़बत विधानसभा क्षेत्र में आयोजित विशाल जनसभाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि इस बार असम की जनता केवल वोट नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई लड़ रही है.
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यह जनसभा नहीं, परिवर्तन का शंखनाद है
कल्पना सोरेन ने सभा में उमड़ी भीड़ के उत्साह को देखते हुए कहा, औरंगाजुली चाय बागान की मिट्टी में आज जो ऊर्जा और अपनापन महसूस हुआ, वह सिर्फ एक जनसभा नहीं बल्कि बदलाव की एक मजबूत शुरुआत है. आप सभी के बीच आकर मेरा यह विश्वास और भी पक्का हो गया है कि असम अब अपने हक, अपने सम्मान और अपने भविष्य के लिए खड़ा हो चुका है.
जेएमएम के उम्मीदवारों के लिए मांगा समर्थन
औरंगाजुली क्षेत्र के विकास के लिए जेएमएम प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने की अपील की. कल्पना सोरेन ने जनता से अपील की कि वे प्रभात दास पानीका को अपना समर्थन दें ताकि उनकी आवाज़ और संघर्ष को विधानसभा में मजबूती मिल सके. प्रीति रेखा बारला के लिए उन्होंने कहा कि उन्हें भारी मतों से विजयी बनाएं ताकि आदिवासी समाज की आवाज़ मजबूती से गूंज सके.
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चुनावी वादे नहीं, अधिकारों का संकल्प
कल्पना सोरेन ने झामुमो के घोषणापत्र को दोहराते हुए इसे अधिकारों की गारंटी बताया. कहा कि हमारा संकल्प साफ है. चाय बागान के श्रमिकों को 500 रुपए न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को 2500 रुपए प्रतिमाह सम्मान राशि, हर परिवार को पक्का आवास, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं को रोज़गार. यह सिर्फ वादे नहीं, बल्कि आपके अधिकार हैं, जिन्हें दिलाना हमारी जिम्मेदारी है.
तीर-धनुष के साथ आदिवासी अस्मिता की लड़ाई
आदिवासी समाज को एकजुट होने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ किसी प्रत्याशी को जिताने का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के गौरव और बेहतर भविष्य की लड़ाई है. उन्होंने लोगों से अपील की कि तीर-धनुष का बटन दबाकर बदलाव की इस ऐतिहासिक लड़ाई को सफल बनाएं.
