गिरीडीह: गिरिडीह कोलियरी क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के खिलाफ सोमवार की रात एक व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया. यह अभियान परियोजना पदाधिकारी जीएस मीणा के नेतृत्व में संचालित हुआ, जिसमें सीसीएल के सुरक्षा विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम शामिल थी.
मौके पर 50 से अधिक बाइक थी मौजूद
छापेमारी कबरीबाद माइंस के समीप की गई, जहां लंबे समय से गुप्त रूप से सुरंग बनाकर कोयले का अवैध खनन किया जा रहा था. टीम के पहुंचते ही वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया. जानकारी के अनुसार, तस्करों ने कोयला निकालने के बाद उसे बाइक के माध्यम से बाहर ले जाने की पूरी तैयारी कर रखी थी. मौके पर 50 से अधिक बाइक मौजूद थीं, जिनसे कोयला ढुलाई की जानी थी. हालांकि, छापेमारी की भनक लगते ही अधिकांश तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर बाइक समेत फरार हो गए, लेकिन जल्दबाजी में एक दर्जन बाइक वहीं छोड़कर भागना पड़ा. सुरक्षा टीम ने इन सभी बाइक को जब्त कर लिया है.
जांच में क्या निकला सामने
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खनन स्थल पर कई जगहों से जमीन को काटकर प्रवेश द्वार (मुहाने) बनाए गए थे. इन मुहानों के जरिए लगभग 500 मीटर से अधिक लंबी सुरंग तैयार कर ली गई थी, जिससे लगातार कोयला निकाला जा रहा था. यह सुरंग किसी भूलभुलैया की तरह थी, जो न केवल अवैध गतिविधियों का केंद्र बनी हुई थी, बल्कि इसमें काम करने वाले लोगों के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकती थी.
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मुफस्सिल पुलिस भी पहुंची मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना की पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया. परियोजना पदाधिकारी जीएस मीणा ने बताया कि कबरीबाद माइंस के चारों ओर सुरक्षा के मद्देनजर तार की फेंसिंग की गई है, लेकिन कोयला चोरों द्वारा इसे काटकर अंदर प्रवेश किया जा रहा था.
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पुलिस ने क्या कहा
उन्होंने कहा कि इस तरह का अवैध खनन न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इसमें शामिल लोग अपनी जान भी जोखिम में डाल रहे हैं. बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के इतनी लंबी सुरंगों में काम करना किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकता है. जब्त की गई सभी बाइक को आगे की कार्रवाई के लिए मुफस्सिल थाना को सौंपा जाएगा. साथ ही, इस अवैध खनन में संलिप्त लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि कोयले की इस काली दुनिया में अभी भी कई ऐसे कोने हैं, जहां कानून की रोशनी पहुंचनी बाकी है लेकिन हर छापेमारी उस अंधेरे को थोड़ा और कम जरूर कर रही है.
