Delhi: चुनाव आयोग देश में निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है. केरल, असम, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को आने हैं. इसके तुरंत बाद, चुनाव आयोग देश के बाकी बचे 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का तीसरा और अंतिम चरण शुरू कर सकता है. बता दें कि इस अभियान के तहत अब तक 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में काम पूरा हो चुका है. अब तक लगभग 60 करोड़ मतदाताओं का डाटा वेरिफाई किया जा चुका है. अब बारी बाकी बचे 39 करोड़ मतदाताओं की है, जो दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और कर्नाटक जैसे 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं. 19 फरवरी को ही चुनाव आयोग ने इन राज्यों को तैयारी पूरी करने के निर्देश दे दिए थे.
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एसआईआर को लेकर सियासी बवाल
यह अभियान केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इस पर सियासी बवाल भी खूब हुआ है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया है और सुप्रीम कोर्ट में निजी तौर पर पक्ष भी रखा है. विपक्षी दलों का आरोप है कि इस अभियान के जरिए ऐसे मतदाताओं को निशाना बनाया जा सकता है जो सत्ताधारी दल के समर्थक नहीं हैं. इससे पहले बिहार में अभियान के दौरान आयोग के अधिकारियों ने दावा किया था कि बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के कई नागरिक मतदाता सूची में पाए गए हैं. हालांकि, बाद में इसका कोई पुख्ता आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया.
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एसआईआर के तहत अवांछित मतदाता हटाये जा रहे
इस ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी नामों, तस्वीरों की गड़बड़ियों, मृतकों के नाम और एक से ज्यादा जगह दर्ज नामों को हटाना है. अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में दिल्ली समेत अन्य राज्यों में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर सत्यापन कर सकते हैं.
