रांची: झारखंड विधानसभा के सेंट्रल हॉल में मंगलवार को राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) झारखंड शाखा की वार्षिक आम बैठक संपन्न हुई. विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में न केवल संगठन की मजबूती पर चर्चा हुई, बल्कि मौजूदा वैश्विक संकटों और युद्ध की विभीषिका पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई.
लोकतंत्र का दूसरा सबसे बड़ा मंच है सीपीए: अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष और सीपीए झारखंड शाखा के सभापति रबीन्द्रनाथ महतो ने संगठन के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि 1911 में स्थापित यह संघ आज 56 देशों का एक भव्य परिवार है. संयुक्त राष्ट्र के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है. हमारा लक्ष्य केवल उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना होना चाहिए. अध्यक्ष ने इस दौरान जानकारी दी कि सीपीए का आगामी 69वां सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित किया जाएगा.
ईरान-इजरायल युद्ध पर चिंता: मूकदर्शक न बने राष्ट्रमंडल देश
बैठक में संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि इस युद्ध की कीमत पूरी दुनिया चुका रही है. युद्ध के कारण गैस की किल्लत और आर्थिक क्षति बढ़ रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि 180 से अधिक शाखाओं वाले इस विशाल नेटवर्क को मूकदर्शक बने रहने के बजाय युद्ध रोकने और शांति बहाली के लिए ठोस हस्तक्षेप करना चाहिए.
दिग्गज नेताओं की रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में पक्ष-विपक्ष के कई वर्तमान एवं पूर्व सदस्य एक साथ मौजूद रहे. मुख्य रूप से राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पाण्डेय सिंह, चंद्रप्रकाश चौधरी, सी पी सिंह, रामचंद्र सिंह, डॉ. नीरा यादव, राज सिन्हा, सबिता महतो, नमन बिक्सल कोनगाड़ी, शशांक शेखर भोक्ता, गिरिनाथ सिंह, मेनका सरदार, दिनेश कुमार षड़ंगी और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे.
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