SAURAV SINGH
Ranchi: झारखंड पुलिस में सिपाहियों की कमी और काम के बढ़ते बोझ के बीच एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जमशेदपुर के मुसाबनी स्थित कांस्टेबल ट्रेनिंग सेंटर (सीटीसी) में अपना प्रशिक्षण पूरा कर चुके 334 सिपाही पिछले पांच महीनों से पासिंग आउट परेड (पीओपी) का इंतजार कर रहे हैं. विडंबना यह है कि एक तरफ थानों में जवानों की कमी के कारण तैनात पुलिसकर्मियों को 12 से 15 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ पूरी तरह तैयार ये जवान ट्रेनिंग सेंटर में ही समय बिताने को मजबूर हैं.
परीक्षा और परिणाम की टाइमलाइन
जानकारी के मुताबिक, इन प्रशिक्षु सिपाहियों के करियर की समय सीमा इस प्रकार रही है. अंतिम परीक्षा 19 सितंबर से 26 सितंबर के बीच आयोजित की गई. नवंबर के शुरुआती हफ्ते में परीक्षाफल पूरी तरह तैयार कर लिया गया था. 12 नवंबर को आधिकारिक तौर पर रिजल्ट जारी कर दिया गया.
नियमतः रिजल्ट आने के तुरंत बाद पासिंग आउट परेड का आयोजन कर जवानों को उनके संबंधित जिलों या इकाइयों में भेज दिया जाना चाहिए था, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी फाइलें दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं.
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कहां-कहां तैनात होने हैं ये जवान?
मुसाबनी में प्रशिक्षण ले रहे इन 334 जवानों का चयन विभिन्न महत्वपूर्ण जिलों और इकाइयों के लिए हुआ है.
जिनमें रांची, जमशेदपुर, धनबाद, विशेष शाखा पीटीसी, रेल पुलिस और जैप के जवान शामिल है.
देरी का दोहरी मार: सिस्टम और सिपाही दोनों परेशान
इस देरी का असर दोतरफा पड़ रहा है. एक तरफ राज्य के बड़े शहरों (रांची, धनबाद, जमशेदपुर) में अपराध नियंत्रण और वीआईपी सुरक्षा के लिए जवानों की सख्त जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ इन 334 सिपाहियों का मानसिक तनाव बढ़ रहा है.
जवानों को समय पर छुट्टी नहीं मिल पा रही है क्योंकि वे आधिकारिक रूप से अभी भी प्रशिक्षु ही माने जा रहे हैं. इसी दौरान मंगलवार को सीटीसी में ट्रेनिंग कर रहे एक सिपाही की मौत हो गई मृतक जवान की पहचान बजरंगी यादव के रूप में हुई जो रांची जिला बल के जवान थे.
