रांची: झारखंड में उत्पाद सिपाही परीक्षाओं को लेकर मचे घमासान के बीच चयन आयोग के अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है, कि प्रश्न पत्र लीक होने का कोई भी पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है. आयोग ने मास्टरमाइंड और माफियाओं के झांसे में आने वाले 159 अभ्यर्थियों को भविष्य की सभी परीक्षाओं के लिए ब्लैकलिस्ट करने का कड़ा निर्णय लिया है.
पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
मामले की शुरुआत तब हुई जब शनिवार शाम एसएसपी राकेश रंजन को गुप्त सूचना मिली, कि तमाड़ थाना क्षेत्र के रडगांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन के पास भारी संख्या में दोपहिया और चार पहिया वाहन खड़े हैं. सूचना के आधार पर पुलिस ने जब छापेमारी की, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था. पुलिस ने मौके से छह महिलाओं सहित 159 अभ्यर्थियों और पांच मास्टरमाइंड को रंगे हाथों गिरफ्तार किया. माफिया द्वारा अभ्यर्थियों को वहां इकट्ठा कर प्रश्न पत्र लीक करने और उनके उत्तर रटवाने का दावा किया जा रहा था. पुलिस ने मौके से चार सेट प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजियां जब्त कीं, जिन्हें तुरंत सत्यापन के लिए आयोग को सौंपा गया.
4 प्रश्न आंशिक रूप से हुए मैच
एसएसपी से प्राप्त इन प्रश्न पत्रों पर आयोग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सचिव और परीक्षा नियंत्रक को मिलान करने के आदेश दिए. नजदीकी केंद्र के प्रश्न पत्र से मिलान किया गया, मात्र चार प्रश्न आंशिक रूप से मैच हुए. पेपर-2 (हिंदी) का आयोग के अधिकारियों द्वारा गहन जांच की गई, जिनमें शून्य प्रश्न मैच हुए.
पेपर-2 (खोरठा) जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम) में जांच की जिम्मेदारी उपायुक्त को दी गई. मात्र एक प्रश्न पूरी तरह और एक आंशिक मैच हुआ. आयोग ने स्पष्ट किया कि जब्त किए गए कागजात वास्तविक परीक्षा प्रश्न पत्रों से मेल नहीं खाते हैं. यह केवल अभ्यर्थियों को ठगने की एक साजिश थी.
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