झारखंड की धरती से निकलेगा सोना: उत्पादन में 133% उछाल, अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई चमक

Ranchi: अब तक कोयला और अभ्रक के लिए पहचाने जाने वाले झारखंड की पहचान बदलने की तैयारी है. राज्य की धरती अब...

Ranchi: अब तक कोयला और अभ्रक के लिए पहचाने जाने वाले झारखंड की पहचान बदलने की तैयारी है. राज्य की धरती अब सोने की चमक से देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने जा रही है. खनन क्षेत्र से आई ताजा जानकारी के अनुसार, प्रदेश में सोने का उत्पादन कुछ ही वर्षों में 12 किलोग्राम से बढ़कर 28 किलोग्राम के पार पहुंच गया है. यह 133% की वृद्धि न केवल राज्य के लिए, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा संकेत मानी जा रही है.

पश्चिमी सिंहभूम बना ‘गोल्ड हब’

सोने की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए खान एवं भूतत्व विभाग ने पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) को केंद्र में रखकर बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है. करीब 1900 हेक्टेयर क्षेत्र में सर्वे और ड्रिलिंग का काम तेजी से चल रहा है, जिससे इस क्षेत्र को भविष्य का ‘गोल्ड हब’ माना जा रहा है.

आधुनिक तकनीक से हो रही खोज

खनिज संपदा की सटीक पहचान के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है. रांची स्थित भूतत्व निदेशालय द्वारा हेलीबॉर्न (एयरबोर्न जिओफिजिकल) सर्वे कराया जा रहा है, जिससे जमीन के भीतर छिपी संरचनाओं की सटीक मैपिंग संभव हो रही है. साथ ही, चिन्हित स्थानों पर बोरहोल ड्रिलिंग कर मिट्टी और पत्थरों के नमूने लिए जा रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यहां क्वार्ट्ज-कार्बोनेट वेन्स में सोने की मौजूदगी मिली है, जिसकी मात्रा 2.17 पीपीएम तक दर्ज की गई है—जो खनन के लिहाज से बेहद उच्च गुणवत्ता मानी जाती है.

झारखंड में सोने के भंडार और अन्वेषण के अब तक के आंकड़े

परडीहा और परासी (पश्चिमी सिंहभूम): इस क्षेत्र में खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा विस्तृत ड्रिलिंग की जा रही है। यहाँ 2.17 पार्ट्स पर मिलियन सोने के उच्च गुणवत्ता वाले संकेत मिले हैं.

जोंको-भरंडिया (पश्चिमी सिंहभूम): यहां लगभग 1900 हेक्टेयर क्षेत्र में अन्वेषण और मैपिंग का कार्य जारी है. आधुनिक हेलीबॉर्न सर्वे के जरिए जमीन के नीचे खनिज संरचनाओं की तलाश की जा रही है.

पहाड़डीह, चक्रधरपुर (पश्चिमी सिंहभूम): इस इलाके में प्रारंभिक संकेतों के मिलने के बाद अब भू-वैज्ञानिकों द्वारा गहन अध्ययन और भौतिक सत्यापन किया जा रहा है.

कुंदरकोचा (पूर्वी सिंहभूम): यह राज्य का स्थापित स्वर्ण क्षेत्र है, जहां से वर्तमान में सोने का व्यावसायिक उत्पादन पहले से ही किया जा रहा है.

तमाड़, पहाड़िया (रांची): राजधानी से सटे इस ग्रामीण क्षेत्र में भी स्वर्ण भंडार होने की प्रबल संभावना जताई गई है और विभाग यहाँ की भू-गर्भीय संरचनाओं पर नजर बनाए हुए है.

भीतरदरी (पूर्वी सिंहभूम): पुराने सर्वेक्षणों और हालिया जांच के आधार पर इस क्षेत्र को भी स्वर्ण अयस्क के लिए महत्वपूर्ण माना गया है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *