रांची: झारखंड सरकार राज्य में सक्रिय वामपंथी उग्रवादियों के खिलाफ अपनी रणनीति और उनके मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी में है. इसी सिलसिले में शुक्रवार राजधानी के प्रोजेक्ट भवन में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है. यह बैठक गृह सचिव की अध्यक्षता में होगी.इस बैठक का मुख्य एजेंडा वामपंथी उग्रवादियों के आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीतिकी समीक्षा करना है. सरकार इस नीति में कुछ आवश्यक संशोधनों पर भी विचार कर रही है, ताकि उग्रवाद का रास्ता छोड़कर आने वाले युवाओं को समाज की मुख्यधारा से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके.
सरेंडर कर चुके नक्सलियों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ:
हजारीबाग ओपन जेल में रह रहे 86 आत्मसर्पित नक्सलियों को उनके हक की सरकारी सुविधाएं और लाभ नहीं मिल पा रहे है. हाल ही में स्पेशल ब्रांच झारखंड द्वारा राज्य के सभी एसएसपी, एसपी को जारी किए गए एक महत्वपूर्ण पत्र में इस बात का खुलासा हुआ है. स्पेशल ब्रांच द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, हजारीबाग ओपन जेल में विभिन्न जिलों के कुल 86 नक्सली रह रहे हैं. इनमें सबसे अधिक लातेहार से 23 और चाईबासा से 14 हैं. इनके अलावा चतरा से नौ दुमका से नौ, गिरिडीह पांच, लोहरदगा से छह, सराइकेला से छह, रांची से चार समेत कई अन्य जिलों के पूर्व नक्सली भी शामिल हैं. इन लोगों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याओं की एक लंबी सूची रखी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरेंडर नीति के क्रियान्वयन में स्थानीय स्तर पर भारी लापरवाही हो रही है.
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