Ranchi: झारखंड में सड़कों का जाल न सिर्फ बिछ रहा है, बल्कि यह प्रदेश की तरक्की की रफ्तार को भी नई ऊंचाई दे रहा है. पिछले नौ वर्षों में राज्य के भीतर यात्रा के समय में भारी कमी आई है. साल 2014 में जहां झारखंड में 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में औसतन 42 मिनट लगते थे, वहीं अब यह समय घटकर मात्र 28 मिनट रह गया है. यानी अब लोग पहले के मुकाबले करीब 33 फीसदी कम समय में अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं. हालांकि, शहरों और गांवों के बीच अभी भी थोड़ा अंतर बना हुआ है. ग्रामीण इलाकों में यह औसत समय 35.9 मिनट है.
पूर्वी सिंहभूम सबसे तेज, सिमडेगा में अभी भी चुनौती
जिला स्तर पर आंकड़ों को देखें तो पूर्वी सिंहभूम सबसे आगे है, जहां यात्रा का समय महज 29.7 मिनट है. वहीं सिमडेगा में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है, जहां 10 किलोमीटर की यात्रा में औसतन 57.6 मिनट का समय लग रहा है. वाहनों की संख्या की बात करें तो देश में जहां हर 83 लोगों पर एक वाहन है, वहीं झारखंड में 100 लोगों पर एक वाहन है.
ऑटो रिक्शा में बड़ी क्रांति
झारखंड अब धीरे-धीरे ग्रीन मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है. राज्य में तीन पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-रिक्शा) ने बाजार पर कब्जा जमा लिया है. इनकी बाजार हिस्सेदारी 58 प्रतिशत तक पहुंच गई है. हालांकि, दो पहिया और चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में अभी भी रफ्तार धीमी है, जो कुल बाजार का मात्र 2 प्रतिशत है.
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सड़क नेटवर्क में भारी विस्तार
राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास को इस बात से समझा जा सकता है कि 2021 में जो सड़क नेटवर्क 12,936 किमी था, वह अब बढ़कर 15,046.52 किमी हो गया है. सड़क घनत्व भी 162.27 से बढ़कर 188.79 किमी प्रति 1,000 वर्ग किमी हो गया है.
नेशनल हाईवे और राज्य सरकार की बड़ी भूमिका
नेशनल हाईवे: राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 3,500 किमी से बढ़कर 3,618 किमी हो गई है.
प्रबंधन में बदलाव: सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि राज्य सरकार के प्रबंधन के तहत आने वाले एनएच खंड की लंबाई 20 किमी से बढ़कर 1,840 किमी हो गई है.
राज्य नेटवर्क: वर्तमान में राज्य के पास 1,231.9 किमी राजकीय राजमार्ग और 4,845.7 किमी मुख्य जिला सड़कें हैं.
कैसा है सड़कों का स्वरूप
• 52.3 प्रतिशत (6,660 किमी) सड़कें इंटरमीडिएट लेन (मध्यवर्ती लेन) वाली हैं.
• 1.9 प्रतिशत (238 किमी) सड़कें ही फिलहाल फोर-लेन या सिक्स-लेन की श्रेणी में आती हैं.
