Lohardaga: जिला राजी पड़हा व्यवस्था लोहरदगा के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त एवं आरक्षी अधीक्षक लोहरदगा को पारंपरिक अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया. इस दौरान पेसा कानून एवं पारंपरिक पड़हा व्यवस्था के अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामाजिक समन्वय को लेकर एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा गया. प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जिला राजी पड़हा व्यवस्था एवं क्षेत्रीय पड़हा व्यवस्थाएं आदिवासी समाज की सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने हेतु निरंतर कार्य कर रही हैं. पड़हा व्यवस्था आदिवासी समाज की प्राचीन लोकतांत्रिक एवं पारंपरिक शासन प्रणाली है, जो ग्राम स्तर से जिला स्तर तक समाज को संगठित रखने, सामाजिक समरसता कायम करने एवं सामूहिक हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है.


पेसा कानून के प्रावधानों के पालन की उठाई मांग
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र एवं पेसा कानून के अंतर्गत पारंपरिक ग्राम सभाओं और पड़हा व्यवस्था को विशेष अधिकार एवं महत्व प्राप्त हैं. पड़हा व्यवस्था समाज और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कानून-व्यवस्था, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण तथा जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय रही है. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पूर्वजों की परंपरा के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में विशु सेंदरा का आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न गांवों एवं पड़हा क्षेत्रों के प्रतिनिधि सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं. इस दौरान समाजहित में आवश्यक नियम एवं दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में बढ़ रही कुरीतियों, अवैध धर्मांतरण, आदिवासी भूमि के गलत हस्तांतरण, सामाजिक विघटन, नशाखोरी एवं गैर-पारंपरिक गतिविधियों पर रोक लगाना होता है. इसके अलावा ग्राम क्षेत्रों में वन उपज, जल स्रोत, सामुदायिक भूमि, धार्मिक स्थलों, छोटे खनिज संसाधनों एवं सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण और उचित उपयोग की निगरानी भी पारंपरिक व्यवस्था द्वारा समय-समय पर किए जाने की बात कही गई.
प्रशासन से रखीं कई महत्वपूर्ण मांगें
मांग पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन से पड़हा पदाधिकारियों की पहचान एवं सम्मान सुनिश्चित करने, पेसा कानून के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन कराने, जल-जंगल-जमीन एवं खनिज संपदा के उपयोग से पूर्व ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य करने, जिला एवं प्रखंड स्तर पर पड़हा व्यवस्था के लिए कार्यालय उपलब्ध कराने की मांग की गई. साथ ही सामाजिक एवं ग्रामीण विवादों के समाधान में पारंपरिक व्यवस्था से परामर्श लेने, सामाजिक बैठकों में प्रशासनिक सहभागिता सुनिश्चित करने, प्रशासन एवं पड़हा व्यवस्था के बीच नियमित संवाद स्थापित करने तथा आदिवासी समाज से जुड़े मामलों में पड़हा पदाधिकारियों की राय लेने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई.
इसके अतिरिक्त जिले में गांजा, भांग, अफीम, अवैध शराब एवं अन्य मादक पदार्थों के व्यापार और सेवन पर कठोर कार्रवाई करने तथा सरना, मसना, अखड़ा, पाहन भूमि एवं अन्य आदिवासी धार्मिक-सामुदायिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रशासन से की गई. मांग पत्र सौंपने वालों में वेल लक्ष्मीनारायण भगत, देवान, मीडिया प्रमुख जगदीप भगत, वीरेंद्र उरांव, भंडारी गोसाई भगत, उप वेल बुद्धेश्वर उरांव, उप देवान बजरंग उरांव, उप देवान बबलू उरांव, उप कोटवार सुखदेव उरांव, उप भंडारी नारायण उरांव, जोंक देवान राजु बखला, जोंक वेल मंजन उरांव, मीडिया प्रभारी सुरेंद्र उरांव, नामी उरांव, चंद्रमोहन उरांव, रमेश उरांव, इद्रदीप तिग्गा, रामप्रसाद उरांव, विरशू उरांव, निरंजन उरांव, किनवा मुंडा सहित अन्य लोग उपस्थित थे. इसकी जानकारी मीडिया प्रमुख जगदीप भगत ने दी.

