कोई सिस्टमिक खतरा नहीं: IDFC फर्स्ट बैंक मामले पर RBI गवर्नर का बयान, शेयरों में 20% तक गिरावट

Desk: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सामने आए 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले...

Desk: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सामने आए 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले पर बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह कोई सिस्टमिक समस्या नहीं है और बैंकिंग व्यवस्था पर इसका व्यापक खतरा नहीं है.

23 फरवरी को दिए बयान में उन्होंने कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली मजबूत पूंजी स्थिति में है. मौजूदा समय में बैंकिंग सिस्टम की कैपिटल एडिक्वेसी लगभग 17% है, जबकि नियामकीय आवश्यकता 11.5% है.

शेयर बाजार में भारी गिरावट

हालांकि, शेयर बाजार ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी. दोपहर करीब 12:35 बजे बैंक का शेयर लगभग 16% गिरकर 70.39 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. कारोबार के दौरान एक समय इसमें 20% तक की गिरावट दर्ज की गई.

क्या है पूरा मामला?

बैंक ने खुलासा किया था कि उसके कुछ कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों ने मिलकर हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में 590 करोड़ रुपये का कथित फ्रॉड किया है. मामले की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक को दे दी गई है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है.

चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. फोरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए गए हैं और स्वतंत्र जांच के लिए केपीएमजी को नियुक्त किया गया है. बैंक ने संकेत दिया है कि वह अन्य बैंकों के लिंक्ड खातों के जरिए रिकवरी की कोशिश करेगा.

कितना बड़ा है वित्तीय असर?

ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, यह राशि बैंक की कुल नेटवर्थ का लगभग 0.9% है. अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2026 के प्री-टैक्स प्रॉफिट का करीब 20% हो सकती है.

यूबीएस का आकलन है कि संदिग्ध राशि वित्त वर्ष 2026 के शुद्ध मुनाफे का करीब 22% तक हो सकती है, हालांकि नेटवर्थ पर इसका असर लगभग 1% के आसपास सीमित रहेगा.

मॉर्गन स्टैनली ने भी अनुमान लगाया है कि टैक्स से पहले के मुनाफे पर लगभग 20% का असर पड़ सकता है. वहीं जेफरीज का कहना है कि बैंक को निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि यह समस्या व्यापक नहीं है.

हरियाणा सरकार का फैसला

घटना के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी लेनदेन से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. वित्त विभाग के सर्कुलर के अनुसार, अगली सूचना तक इन बैंकों में कोई सरकारी धन जमा या निवेश नहीं किया जाएगा.

RBI का व्यापक संदेश

आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम में एनपीए में कमी आई है और पूंजी स्थिति मजबूत हुई है. उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय बैंकिंग व्यवस्था विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है.

साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक ने मनी मार्केट, बैंकिंग और सरकारी प्रतिभूति बाजार में पर्याप्त और टिकाऊ तरलता बनाए रखने का आश्वासन दिया है.

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