प्रशासनिक सुस्ती से नाराज अरूप चटर्जी उतरे सड़क पर, पुलिस और कोयला सिंडिकेट के गठजोड़ पर बोला हमला
धनबाद: मैथन टोल प्लाजा, निरसा
कार्रवाई: विधायक अरूप चटर्जी ने समर्थकों के साथ की छापेमारी.
बरामदगी: अवैध कोयले से लदे 2 ट्रक पकड़े गए (UP जा रहे थे).
आरोप: पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है सतीश अग्रवाल और प्रेम सिंह का सिंडिकेट.
चेतावनी के बाद भी नहीं जागी पुलिस, तो खुद संभाली कमान
Nirsa/Dhanbad: निरसा विधानसभा क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कारोबार के खिलाफ विधायक अरूप चटर्जी का ‘अल्टीमेटम’ जब पुलिस प्रशासन पर बेअसर साबित हुआ, तो विधायक खुद ‘थानेदार’ की भूमिका में नजर आए. दो दिन पूर्व दी गई चेतावनी की मियाद खत्म होते ही, सोमवार सुबह विधायक ने मैथन टोल प्लाजा पर मोर्चा संभाल लिया और अवैध कोयले के खेल का पर्दाफाश किया.
टोल प्लाजा पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सुबह करीब 8:30 बजे विधायक समर्थकों के साथ मैथन टोल प्लाजा पहुंचे. सघन जांच के दौरान कोयले से लदे दो संदिग्ध ट्रकों को रोका गया. ड्राइवरों से कागजात मांगे जाने पर वे बगले झांकने लगे.
जांच में खुलासा: एक ट्रक पश्चिम बंगाल और दूसरा धनबाद में पंजीकृत है. प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह अवैध खेप उत्तर प्रदेश भेजी जा रही थी. विधायक ने तत्काल दोनों ट्रकों को स्थानीय प्रशासन के हवाले कर दिया.
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विधायक के गंभीर आरोप
मीडिया से रूबरू होते हुए विधायक अरूप चटर्जी ने सीधे तौर पर पुलिस और माफिया के गठजोड़ पर प्रहार किया. उन्होंने कुछ गंभीर आरोप लगाए-
नामजद आरोप: विधायक ने ‘सुमित फ्यूल्स’ नामक भट्ठे का जिक्र करते हुए सतीश अग्रवाल और प्रेम सिंह को इस अवैध कारोबार का मुख्य सूत्रधार बताया.
पुलिस की भूमिका: उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कारोबारियों को लगता है पुलिस उनकी जेब में है. खाकी के संरक्षण में रोजाना 15-20 ट्रक कोयला बाहर भेजा जा रहा है.”
व्यापक धंधा: विधायक ने कहा कि सिर्फ कोयला ही नहीं, बल्कि बालू, लोहा, लॉटरी और प्रतिबंधित मांगुर मछली का काला कारोबार भी जोरों पर है.
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प्रशासन को खुली चुनौती
विधायक ने साफ कर दिया है कि यह महज एक दिन की कार्रवाई नहीं है. उन्होंने एलान किया:
“जब तक जिला और पुलिस प्रशासन इन अवैध धंधों पर पूर्णतः ताला नहीं लगाएगा, मेरी नाकेबंदी जारी रहेगी. जनता का संसाधन लूटने वालों को खुली छूट नहीं दी जा सकती.”
अब सवाल यह है: विधायक की इस सीधी कार्रवाई के बाद क्या जिला प्रशासन नींद से जागेगा या फिर रसूखदार माफियाओं के आगे तंत्र एक बार फिर नतमस्तक हो जाएगा?
