खनन कार्यालय के लगातार पत्राचार को भी किया नजरअंदाज, करोड़ों के राजस्व हेराफेरी मामले में इरकॉन-राजा कंस्ट्रक्शन गठजोड़ के जांच की मांग तेज

डीएमओ ने इरकॉन इंटरनेशनल के मुख्य महाप्रबंधक से ईमेल के जरिये कई बार मिट्टी रायल्टी जांच व भुगतान को लेकर किया था पत्राचार, CGM व एजेंसी ने नहीं दिया कोई जवाब
डीएमओ का बयान, कहा – हेराफेरी के खुलासे के बाद कार्रवाई के डर से इरकॉन इंटरनेशनल ने राजा कंस्ट्रक्शन पर दर्ज कराया है प्राथमिकी
Suryakant kamal
Chatra : जिले के शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन निर्माण कार्य से जुड़े एजेंसी द्वारा कथित मिट्टी चालान एवं फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्र के आधार पर करोड़ों के राजस्व हेराफेरी मामले में अब मुख्य कार्य एजेंसी इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है. आरोप है कि पेटी ठेका कंपनी मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन की ओर से प्रस्तुत किए गए 16 कथित फर्जी स्वामित्व स्वच्छता प्रमाण पत्रों के संबंध में जिला खनन कार्यालय द्वारा बार बार पत्राचार किए जाने के बावजूद मुख्य कार्य एजेंसी इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने न तो समय रहते कोई संतोषजनक जवाब दिया और न ही सहायक एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की ही जांच कराई.
ईमेल और पत्र के माध्यम से रिपोर्ट की मांग की गयी
खनन कार्यालय के अनुसार जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने अपने कार्यालय के आधिकारिक ईमेल आईडी से इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक के ईमेल और उसके ऑफिसियल इमेल आईडी पर कई बार पत्राचार किया. खनन कार्यालय की ओर से पत्रांक 424 दिनांक 26 अप्रैल 2024, पत्रांक 425 दिनांक 26 अप्रैल 2024, पत्रांक 684 दिनांक 24 जून 2024, पत्रांक 1195 दिनांक 06 नवंबर 2024 और पत्रांक 177 दिनांक 04 फरवरी 2025 समेत अन्य पत्रों के माध्यम से राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा किए गए मिट्टी उठाव कार्य के स्वामित्व भुगतान से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन और अभिलेखों की मांग मुख्य कार्य एजेंसी इरकॉन इंटरनेशनल से की गई थी.
दो साल बाद भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब
लेकिन करीब दो वर्षों से अधिक समय तक इन पत्रों एवं ईमेल का इरकॉन इंटरनेशनल अथॉरिटी द्वारा कोई सार्थक जवाब खनन विभाग को नहीं दिया गया. इतना ही नहीं इस दौरान इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड कथित रूप से बिना पर्याप्त सत्यापन के राजा कंस्ट्रक्शन को फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों के आधार पर करोड़ों का भुगतान करती रही. ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि जब खनन विभाग लगातार दस्तावेजों के सत्यापन एवं भुगतान संबंधी जानकारी मांग रहा था, तब इरकॉन ने मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया.
पत्थर बालू के स्वामित्व स्वच्छता प्रमाण पत्र का कराया सत्यापन
मामले में एक और महत्वपूर्ण व चौकानेवाला तथय सामने आया है. शिवपुर-कठौतिया रेल लाइन परियोजना में पत्थर एवं बालू आपूर्ति कार्य कर रही मेसर्स आरके इंफ्राकॉप प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत स्वामित्व स्वच्छता प्रमाण पत्रों का सत्यापन इरकॉन ने ही समय रहते जिला खनन कार्यालय से करा लिया था. ऐसे में यह सवाल और भी गहरा हो गया है कि राजा कंस्ट्रक्शन द्वारा प्रस्तुत किए गए मिट्टी रायल्टी से संबंधित 16 कथित फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों के मामले में सहायक एजेंसी को भुगतान से पूर्व वर्षों तक अनदेखी क्यों की गई.
ऐसे में जिले में अब यह मांग तेज हो रही है कि करोड़ों रुपये के राजस्व हेराफेरी के कथित षड्यंत्र में इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड और राजा कंस्ट्रक्शन के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत या संस्थागत लापरवाही रही है या नहीं, इतना ही नहीं इस हाई प्रोफाइल मामले में इरकॉन व राजा कंस्ट्रक्शन के तथाकथित गठजोड़ के मामले की भी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज होने लगी है.
कार्यालय के आधिकारिक पत्राचार की हुई अनदेखी : डीएमओ
जिला खनन पदाधिकारी मनोज टोप्पो ने कहा कि शिवपुर कठौतिया रेल निर्माण कार्य का काम रांची के इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड नामक कंपनी को मिली है. लेकिन एजेंसी ने बिहार के गया जी जिले के मेसर्स राजा कंस्ट्रक्शन के अलावे अन्य एजेंसियों को पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर काम दे दिया है. उन्होंने बताया कि सरकार को किसी भी प्रकार के राजस्व की छति ना हो इसे लेकर जिला खनन कार्यालय द्वारा कई बार आधिकारिक ईमेल एवं पत्रों के माध्यम से मुख्य कार्य एजेंसी इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड से पत्राचार कर कार्य के प्रगति की जानकारी मांगी थी, लेकिन वर्षों तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया.
राजा कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज
उन्होंने कहा कि कार्यालय के आधिकारिक पत्राचार की अनदेखी करते हुए फर्जी स्वामित्व प्रमाण पत्रों के आधार पर भुगतान किए जाने से राजस्व हेराफेरी की आशंका और मजबूत होती है. डीएमओ ने यह भी कहा कि कथित फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद कार्रवाई के डर से स्वयं को बचाने के उद्देश्य से इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने राजा कंस्ट्रक्शन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराया है. हालांकि पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन अब इरकॉन की कार्यशैली और उसकी जवाबदेही को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं.
संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर जारी रखा भुगतान
गौरतलब है कि मामले में जांच एजेंसियों की निगाह अब केवल राजा कंस्ट्रक्शन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह भी जांच का विषय बनता जा रहा है कि जिला खनन कार्यालय के लगातार पत्राचार के बावजूद इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड ने समय रहते आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की और कथित रूप से संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर भुगतान प्रक्रिया को जारी क्यों रखा. ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि इन मजबूत तथयों के आधार पर चतरा के चर्चित चालान व राजस्व घोटाले की जांच कर रही सदर थाना पुलिस की जांच किस ओर जाती है.
