गुमला में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, एंबुलेंस की देरी से मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

Gumla: झारखंड में बनने वाली हर सरकार व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इन दावों...

Gumla: झारखंड में बनने वाली हर सरकार व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आती है. खासकर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें, तो ग्रामीण इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक हैं.

स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्थिति

गुमला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति भगवान भरोसे चल रही है. प्रखंड स्तर पर मौजूद स्वास्थ्य केंद्रों में समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

रेफर के बाद घंटों इंतजार

किसी भी मरीज को जब गंभीर स्थिति में सदर अस्पताल रेफर किया जाता है, तो उसे कई-कई घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में मरीज की हालत और बिगड़ने का खतरा बना रहता है.

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पालकोट से सामने आया मामला

गुमला जिले के पालकोट प्रखंड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक मरीज को सदर अस्पताल गुमला के लिए रेफर किया गया, लेकिन उसे करीब 3 घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा. सामाजिक कार्यकर्ता राहुल बड़ाइक के अनुसार, मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई.

रिम्स रेफर, फिर भी नहीं मिली सुविधा

जब मरीज को किसी तरह गुमला सदर अस्पताल लाया गया, तो वहां भी बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल सकी और उसे रांची रिम्स रेफर कर दिया गया. रिम्स ले जाने के लिए भी समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से मरीज को और अधिक परेशानी उठानी पड़ी.

लगातार बनी रहती है समस्या

यह कोई एक दिन की समस्या नहीं है. गुमला जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में यह स्थिति लगातार बनी हुई है, जहां समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है.

दावों और हकीकत में फर्क

इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे करते रहते हैं. एक तरफ जहां मंत्रियों के लिए आलीशान सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जूझ रही है.

सवाल अब भी कायम

बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद हालात में सुधार नहीं हो रहा है. सवाल यही है कि आखिर कब तक मरीजों को एंबुलेंस और इलाज के लिए इस तरह संघर्ष करना पड़ेगा.

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