चक्रधरपुर: जामिया मिस्बाहुल उलूम सलफिया, झुमपुरा के तत्वावधान में आयोजित ‘दसवां पैग़ाम-ए-हिरा कांफ्रेंस’ धार्मिक सद्भाव और समाज सुधार के संदेश के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. इस भव्य जलसे में क्षेत्र के लगभग 15,000 लोगों ने शिरकत की.
मुख्य आकर्षण
इस अवसर पर जामिया मिस्बाह से शिक्षा पूर्ण करने वाले 24 विद्यार्थियों (हाफिज) को सम्मानित किया गया, जिन्होंने संपूर्ण कुरआन कंठस्थ कर लिया है. सभी 24 हाफिजों की पारंपरिक ‘दस्तारबंदी’ (पगड़ी बांधकर सम्मान) की गई, जो उनके शैक्षणिक और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है.
समाज सुधार पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता जमीयत अहले हदीस ओडिशा के नायब सदर ताहा सईद खालिद मदनी ने की, जबकि निगरानी सदर फैयाज आलम ने की. जलसे का संचालन हाफिज मोहम्मद इश्तियाक अशरी ने किया और कार्यक्रम का शुभारंभ पवित्र कुरआन की तिलावत से हुआ. भारत के विख्यात वक्ता मौलाना जरजिस अशरी ने ‘इसलाह-ए-मुआशरा’ (समाज सुधार) पर जोर देते हुए कहा कि हमारी पहचान हमारे समाज से है. उन्होंने आह्वान किया कि समाज के प्रबुद्ध लोग आगे आएं और व्याप्त बुराइयों तथा असामाजिक तत्वों को रोकें. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हम बुराई को नहीं रोकते, तो हम भी उस गुनाह के भागीदार बन जाते हैं.
महिलाओं की भूमिका
विजय बाड़ा मस्जिद के इमाम मौलाना अबू हुरैरा मदनी ने समाज निर्माण में महिलाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “मां की गोद बच्चे की पहली पाठशाला होती है. समाज के उतार-चढ़ाव को समझाने वाला मां से बेहतर कोई शिक्षक नहीं हो सकता.”
इस अवसर पर मुशीरुल इखलाक मदनी और अब्दुल्लाह साकिब मदनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जमीयत अहले हदीस झुमपुरा की टीम ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया.
