NEWS DESK: सरकार ने LPG सिलेंडर की बुकिंग प्रक्रिया को लेकर नई जानकारी साझा की है. बताया गया है कि अब यह सिस्टम लगभग पूरी तरह डिजिटल हो चुका है. करीब 98 प्रतिशत रीफिल बुकिंग ऑनलाइन या अन्य डिजिटल माध्यमों से की जा रही है. इससे उपभोक्ताओं को सुविधा मिल रही है और पूरी प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और पारदर्शी हो गई है.
DAC से सुरक्षित हो रही डिलीवरी
सरकार के अनुसार, अब लगभग 94 प्रतिशत LPG डिलीवरी में डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का इस्तेमाल किया जा रहा है. यह कोड उपभोक्ता के मोबाइल पर भेजा जाता है और उसी के आधार पर सिलेंडर की डिलीवरी पूरी होती है. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस सही ग्राहक तक पहुंचे और किसी भी तरह की गड़बड़ी या धोखाधड़ी को रोका जा सके.
सप्लाई पर फोकस, हर दिन 50 लाख सिलेंडर की डिलीवरी
अधिकारियों ने बताया कि तेल कंपनियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रही हैं. वर्तमान में हर दिन 50 लाख से ज्यादा घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई की जा रही है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण सप्लाई पर दबाव के बावजूद, घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित गैस उपलब्ध कराने की कोशिश जारी है.
तेजी से बढ़ा डिजिटल बुकिंग का आंकड़ा
LPG बुकिंग का डिजिटल ग्राफ तेजी से बढ़ा है. पहले जहां केवल 71 प्रतिशत बुकिंग डिजिटल माध्यम से होती थी, वह मार्च में बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई और अब करीब 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसका मतलब है कि ज्यादातर उपभोक्ता अब ऐप, कॉल या SMS के जरिए आसानी से गैस बुक कर रहे हैं.
DAC का बढ़ता इस्तेमाल, घट रही धोखाधड़ी
डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का उपयोग भी तेजी से बढ़ा है. पहले यह आंकड़ा 53 प्रतिशत था, जो मार्च में 72 प्रतिशत हुआ और अब करीब 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है. इस सिस्टम से फर्जी डिलीवरी और गलत उपयोग पर काफी हद तक रोक लगी है.
कीमतों का सीधा असर आम लोगों पर
LPG की कीमतों में बदलाव का सीधा असर आम लोगों के बजट पर पड़ता है, क्योंकि देश के ज्यादातर घरों में खाना बनाने के लिए यही मुख्य ईंधन है. कीमत बढ़ने पर मासिक खर्च भी बढ़ जाता है, जिससे परिवारों की आर्थिक योजना प्रभावित होती है.
छोटे कारोबार भी हो रहे प्रभावित
गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. छोटे व्यवसाय जैसे रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड विक्रेता और कैटरिंग सेवाएं भी इससे प्रभावित होते हैं. गैस महंगी होने या सप्लाई प्रभावित होने पर उनकी लागत बढ़ जाती है, जिसका असर उनकी सेवाओं की कीमत पर भी देखने को मिलता है.
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