रांची: झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बिना किसी पूर्व सूचना और बिना अपने पारंपरिक सुरक्षा काफिले के सीधे प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) पहुंच गए. अमूमन दर्जनों गाड़ियों के सायरन और सुरक्षाकर्मियों के घेरे में रहने वाले मुख्यमंत्री को महज एक साधारण गाड़ी से मंत्रालय आते देख वहां मौजूद हर शख्स अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहा था.
ट्रैफिक और जमीनी हकीकत का लिया जायजा:
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री का यह कदम कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी योजना का हिस्सा था. बताया जा रहा है कि सीएम सोरेन रांची शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सड़कों की स्थिति और आम जनता को रोजाना होने वाली समस्याओं का जमीनी स्तर पर आकलन करना चाहते थे. वे यह देखना चाहते थे कि बिना वीआईपी मूवमेंट के शहर की रफ्तार कैसी रहती है और आम नागरिक किन चुनौतियों से जूझते हैं.
मुख्यमंत्री ने सादगी की मिसाल पेश करते हुए सीधे अपने कक्ष की ओर रुख किया:
जैसे ही मुख्यमंत्री की इकलौती गाड़ी प्रोजेक्ट भवन के गेट पर रुकी, वहां तैनात सुरक्षाकर्मी और अधिकारी सन्न रह गए. आम तौर पर मुख्यमंत्री के आने से पहले पूरा रूट क्लियर कराया जाता है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते हैं, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं था. मंत्रालय के गलियारों में चर्चा रही कि मुख्यमंत्री ने सादगी की मिसाल पेश करते हुए सीधे अपने कक्ष की ओर रुख किया. हालांकि सुरक्षा के लिहाज से यह एक बड़ा रिस्क माना जा रहा था, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मुख्यमंत्री पूरी तरह सहज नजर आए. उनके साथ न तो सुरक्षाकर्मियों का बड़ा दल था और न ही पायलट गाड़ियां.
दूसरी बार दिखा ऐसा अंदाज:
झारखंड के राजनीतिक इतिहास में यह संभवतः पहला मौका है जब कोई मुख्यमंत्री इस तरह बिना किसी प्रोटोकॉल और तामझाम के मंत्रालय पहुंचा हो. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मुख्यमंत्री को एक आम नागरिक की तरह ट्रैफिक में चलते और बिना शोर-शराबे के दफ्तर पहुंचते देखना सुखद अहसास था. कुछ महीने पहले भी सीएम गाड़ी में सवार होकर पूरे रांची शहर के बाहरी इलाके का भ्रमण किए थे.
