Ranchi/Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में दिए गए आदेश पर ददई गुट ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की है. संगठन ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय का निर्णय किसी भी गुट को अंतिम वैधानिक मान्यता प्रदान नहीं करता है, जैसा कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रचारित किया जा रहा है.
सदस्यता सत्यापन से जुड़ा मामला अभी भी दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित
इंटक के राष्ट्रीय महासचिव एन. जी. अरुण और प्रवक्ता एवं अधिवक्ता ऋषिकेश मिश्रा ने संयुक्त बयान में कहा है, कि अदालत ने केवल भारत सरकार को 04.01.2017 के पत्र की पुनः समीक्षा करने और कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई अंतिम राहत नहीं दी है और न ही संगठन के आंतरिक नेतृत्व विवाद पर कोई अंतिम मुहर लगाई है. वर्ष 2007 के बाद से केंद्रीय श्रमिक संगठनों का कोई आधिकारिक सत्यापन नहीं हुआ है. सदस्यता सत्यापन से जुड़ा मामला अभी भी दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है.
न्यायालय ने स्वयं स्वीकार किया है कि इंटक के भीतर आंतरिक विवाद और विभिन्न गुटों के बीच नेतृत्व को लेकर कानूनी वाद-विवाद जारी हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जनवरी 2020 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जो इस मामले में महत्वपूर्ण है. ददई गुट ने याचिकाकर्ता के दावों को भ्रामक चित्रण करार देते हुए कहा कि संगठन पर एकाधिकार स्थापित करने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया जाएगा और जल्द ही इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की जाएगी.
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