Ranchi: भीषण गर्मी ने झारखंड की बिजली व्यवस्था की असली परीक्षा शुरू कर दी है. राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में बिजली की मांग अचानक तेज उछाल पर पहुंच गई है. हालात ऐसे हैं कि जहां रांची को रोजाना 350 से 400 मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ रही है, वहीं पूरे झारखंड की मांग 1100 से 1300 मेगावाट के बीच पहुंच गई है.
इस बढ़ती मांग ने बिजली विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. हालांकि, सेंट्रल पूल और अन्य स्रोतों से पर्याप्त बिजली मिल रही है, लेकिन असली संकट तब खड़ा होता है जब ग्रीड में तकनीकी गड़बड़ी आ जाती है और सप्लाई अचानक बाधित हो जाती है.
SLDC में हाई लेवल मॉनिटरिंग, अफसर खुद मैदान में
इसी चुनौती से निपटने के लिए ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी के श्रीनिवासन खुद मोर्चे पर नजर आए. उन्होंने कुसई कॉलोनी स्थित स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) पहुंचकर करीब डेढ़ घंटे तक बिजली व्यवस्था की गहन समीक्षा की. सुबह से दोपहर तक चले इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने राज्यभर के लोड की रियल टाइम स्थिति का जायजा लिया.
इंजीनियरों को सख्त निर्देश- लोड बैलेंस बिगड़ने न पाए
सीएमडी ने मौके पर मौजूद अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिए, कि किसी भी ग्रीड पर लोड का असंतुलन नहीं होना चाहिए. खासकर इस भीषण गर्मी में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में हर स्तर पर निगरानी जरूरी है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोड डिस्ट्रीब्यूशन पर पैनी नजर रखें और किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत ठीक करें. निरीक्षण के दौरान बिजली संचरण निगम के एमडी के के वर्मा भी मौजूद रहे और उन्होंने भी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया.
सुधार की उम्मीद
सीएमडी के इस अचानक दौरे के बाद संकेत साफ हैं, कि अब बिजली व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. विभाग का दावा है कि इस हाई लेवल मॉनिटरिंग के बाद आने वाले दिनों में बिजली सप्लाई और ज्यादा स्थिर और बेहतर होगी.
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