NEWS DESK: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग एक व्यक्ति को बाजार के बीच जमकर पीटते नजर आ रहे हैं. वीडियो में पीड़ित की पत्नी भी दिखाई देती है, जो उसे बचाने की कोशिश कर रही है. दावा किया जा रहा है कि मारपीट करने वाले लोग क्रेडिट कार्ड रिकवरी एजेंट्स हैं, जो बकाया रकम वसूलने पहुंचे थे.
वीडियो से उठे सवाल
इस घटना ने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है. कई लोग रिकवरी एजेंट्स के इस कथित व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है. इसी बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई रिकवरी एजेंट्स को इस तरह का व्यवहार करने की इजाजत है?
Reserve Bank of India के नियम क्या कहते हैं
RBI की गाइडलाइंस साफ तौर पर बताती हैं कि रिकवरी एजेंट्स को अपनी सीमाओं में रहकर काम करना होता है:
- किसी भी हालत में कंज्यूमर के साथ मारपीट या बदसलूकी नहीं की जा सकती.
- कॉल करने का समय सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक ही तय है.
- बिना पूर्व सूचना के कंज्यूमर के घर जाना मना है.
- एजेंट्स के पास बैंक की ओर से अधिकृत दस्तावेज और वैध आईडी कार्ड होना जरूरी है.
- ग्राहक की निजी जानकारी गोपनीय रखना अनिवार्य है.
- कंज्यूमर और एजेंट के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग होना चाहिए.
कंज्यूमर के अधिकार
अगर कोई रिकवरी एजेंट आपको परेशान करता है, तो आप उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं. सबसे पहले संबंधित बैंक में शिकायत दर्ज करें. जरूरत पड़ने पर पुलिस में भी मामला दर्ज कराया जा सकता है.इसके अलावा, आप एजेंट्स से तय समय पर ही कॉल करने और शालीनता से बात करने की मांग कर सकते हैं. यदि इसके बावजूद समस्या बनी रहती है, तो आपके पास कानूनी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है. इस तरह की घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि कर्ज वसूली के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा या दबाव पूरी तरह गैरकानूनी है.
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