Click Here
Click Here
Click Here

पलामू: आनंदमूर्ति जी का 105वां जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ संपन्न

Palamu: मेदिनीनगर के स्थानीय नई मुहल्ला स्थित आनंद मार्ग जागृति में आनंद मार्ग के संस्थापक प्रभात रंजन सरकार ‘श्री श्री आनंदमूर्ति जी’...

Palamu: मेदिनीनगर के स्थानीय नई मुहल्ला स्थित आनंद मार्ग जागृति में आनंद मार्ग के संस्थापक प्रभात रंजन सरकार ‘श्री श्री आनंदमूर्ति जी’ का 105वां जन्मदिवस ‘आनंद पूर्णिमा उत्सव’ के रूप में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया. 1921 में जमालपुर (बिहार) में जन्मे बाबा के इस जन्मोत्सव पर जिले भर से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया.

भजन, साधना और शोभायात्रा

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह भजन, कीर्तन और सामूहिक साधना से हुआ. इसके बाद एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो स्टेशन रोड, चर्च रोड, कचहरी चौक, सरकारी बस डिपो और शादिक चौक जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस जागृति परिसर पहुंची. इस दौरान “मानव मानव एक है, मानव का धर्म एक है” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा. शोभायात्रा का उद्देश्य समाज में प्रेम, शांति और एकता का संदेश फैलाना था.

WhatsApp Image 2026-06-13 at 2.57.59 PM (1)

Also Read: खूंटी में PLFI उग्रवादियों का उत्पात- निर्माण कार्य में लगी मशीन में आग, फायरिंग

प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम

उत्सव के दौरान तांडव और कोशिकी नृत्य प्रतियोगिताओं ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया. इसके साथ ही बच्चों के लिए पेंटिंग और क्विज जैसी रचनात्मक गतिविधियां भी आयोजित की गईं. आध्यात्मिक पक्ष को मजबूत करते हुए श्री श्री आनंदमूर्ति जी द्वारा दी गई ‘आनंदवाणी’ का वाचन मगही, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी और नागपुरी सहित कई भाषाओं में किया गया, जो भाषाई विविधता और वैश्विक एकता का प्रतीक बना.

आध्यात्मिक संदेश पर जोर

वरिष्ठ आनंदमार्गी बैद्यनाथ जी ने गुरुदेव के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने मानवता के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए साधना का मार्ग दिखाया. कार्यक्रम में परमब्रह्म की कृपा और साधना के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया कि मनुष्य को अपने सुख दुख के लिए ईश्वर को दोष देने के बजाय साधना के माध्यम से उनकी करुणा को समझने का प्रयास करना चाहिए.

श्रद्धालुओं का योगदान

इस आयोजन को सफल बनाने में भुक्ति प्रधान मधेश्वर जी, विश्वनाथ जी, लक्ष्मण जी सरोज, अखिलेश, अरविंद, प्रदीप, रामस्वरूप, मणिकांत, दीपक, शंकरसन, रेणु, मधुबाला, शारदा और पूनम सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं का सक्रिय योगदान रहा. यह उत्सव मानवता के कल्याण और आत्म साक्षात्कार के प्रति अटूट आस्था के साथ संपन्न हुआ.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *